जशपुर, 1 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव क्षेत्र के पाकरगांव में बिजली पोल शिफ्टिंग के दौरान हुए हादसे में दो श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। घटना पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार के नियमानुसार 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इस तरह दोनों परिवारों को कुल 8 लाख रुपये की सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने घटना को दुखद बताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने दिवंगत श्रमिकों की आत्मा की शांति और उनके परिजनों को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
बिजली के खंभे में करंट आने से हादसा
जानकारी के अनुसार, पाकरगांव में बिजली के खंभे को शिफ्ट करने का काम चल रहा था। इसी दौरान खंभा बिजली के तार के संपर्क में आ गया, जिससे वहां काम कर रहे श्रमिक करंट की चपेट में आ गए। हादसे में दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मृतकों की पहचान ग्राम भेड़ीमुड़ा निवासी अलेख एक्का और गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर क्षेत्र के ग्राम बाम्हनडीह निवासी टोमन ध्रुव के रूप में हुई है।
परमिट और सुरक्षा व्यवस्था की होगी जांच
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घटना के बाद बिजली आपूर्ति बंद करने की प्रक्रिया और कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन मामले की विस्तृत जांच की तैयारी कर रहा है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि पोल शिफ्टिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही बिजली लाइन बंद करने के लिए जरूरी परमिट और निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।
ठेका श्रमिकों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद बिजली विभाग के कार्यों में लगे ठेका श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं। जांच के दौरान सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, काम शुरू करने से पहले बिजली आपूर्ति बंद होने की पुष्टि और अन्य सुरक्षा प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री की सहायता घोषणा के बाद मृतक श्रमिकों के परिजनों को नियमानुसार राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। वहीं, हादसे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई थी या नहीं।

