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बिजली करंट से तीन की मौतें, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

The Chhattisgarh High Court has taken a strong stand in the case of the electrocution of three people, including a former sarpanch and his two sons, in Bilaspur district of Chhattisgarh. A division bench comprising Chief

Electric shock

बिलासपुर, 07 जुलाई| छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों समेत तीन लोगों की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने संज्ञान लेते हुए उसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज किया है।

कोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर और ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने उनसे राज्य में बिजली ढांचे के निरीक्षण और रखरखाव की मौजूदा व्यवस्था, दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अपनाए जा रहे सुरक्षा उपायों और लापरवाही तय करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी मांगी है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली प्रवाहित फेंसिंग के कारण लगातार लोगों की जान जा रही है। कई लोग अपनी फसल, संपत्ति या पशुओं की सुरक्षा के लिए खेतों, फार्महाउस और घरों के आसपास अवैध रूप से बिजली युक्त फेंसिंग लगा देते हैं। इसकी चपेट में आने से अनजान लोगों को गंभीर नुकसान होता है और कई मामलों में उनकी मौत तक हो जाती है।

डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, लेकिन घटनाओं की लगातार पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि केवल आपराधिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इन हादसों को रोकने के लिए प्रभावी, ठोस और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करना आवश्यक है।

कोर्ट ने चिंता जताई कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू पशुओं और वन्यजीवों की भी इससे मौत हो रही है। ऐसे में यह मामला सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ पशु संरक्षण से भी जुड़ा गंभीर विषय है।

 

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