नई दिल्ली, 04 नवम्बर। भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में 5 नवंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। साल 2013 में इसी दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने पहले मंगल मिशन ‘मंगलयान’ का सफल प्रक्षेपण किया था। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अंतरग्रहीय अंतरिक्ष अभियानों के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया था।
मंगलयान को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी25 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था। करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस मिशन ने दुनिया को दिखाया कि सीमित बजट में भी भारत जटिल अंतरिक्ष अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने की क्षमता रखता है।
पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा तक पहुंचा भारत
मंगलयान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की कक्षा तक पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना। इसके साथ ही भारत मंगल की कक्षा में यान स्थापित करने वाला एशिया का पहला देश भी बना। इस उपलब्धि ने वैश्विक अंतरिक्ष जगत में भारत की तकनीकी क्षमता को नई पहचान दिलाई।
10 महीने की यात्रा के बाद मंगल की कक्षा में पहुंचा यान
करीब 10 महीने की लंबी यात्रा पूरी करने के बाद 24 सितंबर 2014 को मंगलयान सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित हो गया। इस मिशन के जरिए मंगल के वातावरण और सतह से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई गईं।
मंगलयान मिशन ने न केवल भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत और तकनीकी दक्षता को दुनिया के सामने रखा, बल्कि आने वाले अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी नई राह खोली। आज भी यह मिशन भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाता है।

