रायपुर, 19 जुलाई। CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के 1.50 लाख से अधिक पेंशनरों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि के लिए मध्य प्रदेश सरकार की पूर्व अनुमति लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले से वर्षों से लंबित एक बड़ी प्रशासनिक और कानूनी समस्या का समाधान हो गया है।
दरअसल, वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत यह व्यवस्था लागू थी कि संयुक्त मध्य प्रदेश के समय के वे कर्मचारी, जो छत्तीसगढ़ से सेवानिवृत्त हुए थे, उनके महंगाई भत्ते में किसी भी बढ़ोतरी के लिए मध्य प्रदेश सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी। पेंशनर संगठन पिछले 25 वर्षों से इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग कर रहे थे।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों राज्यों के बीच इस विषय पर एक संयुक्त एमओयू (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के बाद अब महंगाई भत्ते में वृद्धि के लिए मध्य प्रदेश की स्वीकृति की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो गई है।
उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार पेंशनरों के महंगाई भत्ते में वृद्धि का निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकेगी और उसे तत्काल लागू भी कर पाएगी। पहले इस प्रक्रिया के लिए फाइलें भोपाल भेजनी पड़ती थीं और अनुमति मिलने तक लंबा इंतजार करना पड़ता था।
सरकार के इस फैसले का सीधा लाभ राज्य के 1.50 लाख से अधिक पेंशनरों और उनके परिवारों को मिलेगा। अब जब भी छत्तीसगढ़ सरकार अपने वर्तमान कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाएगी, उसी समय पेंशनरों का भी डीए स्वतः बढ़ जाएगा। इससे पेंशनरों को समय पर बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मिल सकेगा और उन्हें अनावश्यक प्रशासनिक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से वर्षों पुरानी एक जटिल व्यवस्था का समाधान हुआ है, जिससे पेंशनरों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।


