Deepak Baij Statement: बस्तर दशहरा पर सियासी घमासान… दीपक बैज ने भाजपा पर साधा निशाना

Deepak Baij Statement: बस्तर दशहरा पर सियासी घमासान… दीपक बैज ने भाजपा पर साधा निशाना

रायपुर, 24 अक्टूबर। Deepak Baij Statement: बस्तर दशहरा और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर दौरे को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा पर निशाना साधते हुए मुरिया दरबार की परंपराओं से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रपति के दो बार बस्तर आने से आखिर क्षेत्र को क्या फायदा हुआ? बैज ने बस्तर दशहरा की परंपराओं को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने मुरिया दरबार जैसी महत्वपूर्ण परंपरा को मजाक बनाकर रख दिया है।

नक्सलवाद के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा

दीपक बैज ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि जेलों में बंद नक्सलियों और सरकार के साथ बातचीत कर रहे नक्सलियों को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उनके मुताबिक, इस मुद्दे पर सरकार को अपनी नीति और कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

1 नवंबर को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की रैली

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इंडिया गठबंधन के प्रस्तावित प्रदर्शन की जानकारी देते हुए कहा कि 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें हजारों कांग्रेसी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शन में कथित वोट चोरी, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए मतदाताओं के नाम काटे जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे।

स्मृति ईरानी के दौरे पर भी साधा निशाना

भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दौरे को लेकर भी दीपक बैज ने सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या स्मृति ईरानी भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी को कम करने में सफल होंगी? इसके साथ ही उन्होंने महंगाई, भ्रष्टाचार और आम जनता को राहत देने के भाजपा के दावों पर भी सवाल खड़े किए।

गैस सिलेंडर और महंगाई पर मांगा जवाब

बैज ने गैस सिलेंडर की कीमतों और सस्ती शक्कर जैसे मुद्दों को उठाते हुए पूछा कि क्या भाजपा सरकार आम लोगों को इन मामलों में राहत दे पाएगी। उन्होंने महंगाई से परेशान जनता को राहत देने के दावों पर भी सवाल उठाए।

कुल मिलाकर, दीपक बैज के इन बयानों से छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं। बस्तर दशहरा की परंपराओं, नक्सलवाद, महंगाई और चुनावी प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर आने वाले दिनों में सियासी बहस और तेज हो सकती है।

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