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Bastar Education Model: जावंगा एजुकेशन सिटी का कमाल… जनजातीय बच्चों ने NEET से ग्लोबल कंपनियों तक बनाई पहचान

दंतेवाड़ा, 30 सितम्बर। Bastar Education Model: छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर स्थित दंतेवाड़ा जिले की जावंगा एजुकेशन सिटी जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल विकास, खेल और रोजगार के नए अवसरों का केंद्र बनकर उभरी है। कभी शिक्षा की सीमित सुविधाओं से जूझने वाले क्षेत्र के बच्चे अब मेडिकल शिक्षा से लेकर डिजिटल तकनीक और कॉरपोरेट क्षेत्र तक अपनी पहचान बना रहे हैं। यहां बेटियां नीट-यूजी परीक्षा पास कर चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, वहीं युवा प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी हासिल कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मई 2015 को जावंगा एजुकेशन सिटी का दौरा कर परिसर का निरीक्षण किया था और विद्यार्थियों से संवाद किया था।

150 एकड़ में फैली एजुकेशन सिटी, 7,436 विद्यार्थी ले रहे शिक्षा

अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी करीब 150 एकड़ में फैली हुई है। यहां स्कूल शिक्षा, आवासीय शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े 43 शैक्षणिक एवं आवासीय संस्थान संचालित हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिसर में कुल 7,436 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 4,692 बालिकाएं शामिल हैं। वहीं, 5,370 विद्यार्थी छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

दूरस्थ गांवों और जंगलों से आने वाले बच्चों को एक ही परिसर में शिक्षा, आवास, भोजन और मार्गदर्शन की सुविधाएं मिल रही हैं। इससे स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर में भी कमी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ड्रॉपआउट दर 50 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत रह गई है।

जावंगा की बेटियां NEET-UG पास कर बढ़ रहीं आगे

एजुकेशन सिटी में बालिका शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। ‘छू लो आसमान’ कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली की छात्राओं ने नीट-यूजी परीक्षा में सफलता हासिल कर चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता बनाया है।

इन छात्राओं को शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा से जुड़े पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिला है। यह उपलब्धि दूरस्थ क्षेत्रों की बेटियों के लिए उच्च शिक्षा के बढ़ते अवसरों को दर्शाती है।

डिजिटल स्किल से ग्लोबल कंपनियों तक पहुंच रहे युवा

जावंगा एजुकेशन सिटी में आधुनिक तकनीक और रोजगारपरक प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। यहां संचालित नवगुरुकुल में युवाओं को डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस केंद्र से प्रशिक्षित करीब 100 युवा प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार हासिल कर चुके हैं। इनमें एक छात्रा का चयन एसएंडपी ग्लोबल में डेटा एनालिटिक्स के पद पर हुआ है।

इसके अलावा, आईटीआई में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन पाठ्यक्रमों में शामिल 95 प्रतिशत विद्यार्थी जनजातीय समुदाय से हैं। कौशल प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को तकनीकी दक्षता और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।

खेल सुविधाओं से निखर रही आदिवासी बच्चों की प्रतिभा

शिक्षा के साथ खेलों को बढ़ावा देने के लिए भी परिसर में विशेष सुविधाएं विकसित की गई हैं। एकलव्य खेल परिसर में स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

‘खेलो इंडिया’ से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000 आदिवासी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। यहां बच्चों को खेल कौशल के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने का अवसर मिल रहा है।

बालिका शिक्षा और जरूरतमंद बच्चों पर विशेष ध्यान

एजुकेशन सिटी में संचालित कन्या विद्यालयों और छात्रावासों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ने का अवसर मिल रहा है। स्वामी आत्मानंद स्कूल में करीब 1,200 छात्राएं कला, विज्ञान और वाणिज्य विषयों की पढ़ाई कर रही हैं। लाइब्रेरी, प्रयोगशालाओं, आवास और भोजन जैसी सुविधाओं से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है।

वहीं, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे क्षेत्रों में हिंसा से प्रभावित तथा अनाथ बच्चों को आस्था विद्या मंदिर में शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। यहां बच्चों की परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखकर उन्हें शिक्षा, आवास, खेल और संगीत जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाता है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

जावंगा एजुकेशन सिटी की पहल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की जानकारी भी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, केपीएमजी ने इसे दुनिया की 100 नवोन्मेषी परियोजनाओं में शामिल किया था। इसके अलावा, दंतेवाड़ा प्रशासन को इस पहल के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की जानकारी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी इस परिसर का दौरा कर चुके हैं।

जावंगा एजुकेशन सिटी आज बस्तर के जनजातीय बच्चों को शिक्षा, तकनीकी कौशल, खेल और रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यहां से आगे बढ़ रहे विद्यार्थी यह दिखा रहे हैं कि बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और मार्गदर्शन मिलने पर दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकते हैं।

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