रायपुर, 25 अक्टूबर। CG News: छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ी घोषणाएं की हैं। दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने शामिल 70 लोककला दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इनमें पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी और तीन आदिवासी नृत्य दल भी शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाएं प्रदेश के इतिहास, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इनका संरक्षण करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण और कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
तीजन बाई के नाम पर होगा लोककला अलंकरण
मुख्यमंत्री ने पंडवानी की महान कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी कला-साधना से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी विरासत को सहेजने के लिए तीजन बाई के गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही, वहां के हाईस्कूल का नामकरण उनके नाम पर करने की पहल की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इसी वर्ष से राज्योत्सव के अवसर पर तीजन बाई के नाम पर लोककला अलंकरण प्रदान किया जाएगा। इससे प्रदेश के लोक कलाकारों को अपनी पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
बानबरद स्कूल का होगा उन्नयन, सड़क निर्माण की घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्षेत्र के विकास से जुड़ी मांगों को पूरा करते हुए मिडिल स्कूल बानबरद को हाईस्कूल में उन्नत करने की घोषणा की। इसके अलावा अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड का निर्माण भी कराया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में विकसित होगी फिल्म सिटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को व्यापक मंच उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन किया गया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन पहलों से प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और कलाकारों तथा युवाओं के लिए रोजगार एवं रचनात्मक अवसरों के नए रास्ते खुलेंगे।
46 वर्षों से लोककला के संरक्षण में जुटा ज्ञानश्रोत कला मंच
मुख्यमंत्री ने ज्ञानश्रोत कला मंच के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि 46 वर्षों से लोककला और संस्कृति के संरक्षण के लिए लगातार काम करना बड़ी उपलब्धि है। इस मंच ने कलाकारों को मंच देने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने पद्मश्री डॉ. उषा बारले और मंच से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हैं। ये केवल गीत और नृत्य नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा हैं। उन्होंने कलाकारों से महासम्मेलन की परंपरा को आगे भी इसी उत्साह के साथ जारी रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को विधायक रिकेश सेन ने भी संबोधित किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कलाकारों की विभिन्न मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इस अवसर पर विधायक दुर्ग ग्रामीण ललित चंद्राकर, विधायक साजा ईश्वर साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रदेशभर से आए लोक कलाकार और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

