रायपुर, 01 नवम्बर। Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। क्षेत्र में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने और शांति बहाल होने के मद्देनजर शासन ने 116 राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किया है। इस फैसले के तहत भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के कई वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई है।
गृह विभाग की समीक्षा के बाद भाजपा और कांग्रेस के 9 प्रमुख नेताओं की Z+ सुरक्षा घटाकर Z श्रेणी कर दी गई है। इनमें कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक बैज, पूर्व मंत्री कवासी लखमा और भाजपा के वरिष्ठ नेता महेश गागड़ा के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इसके अलावा Z श्रेणी में शामिल नेताओं को Y+ और Y+ श्रेणी वालों को Y सुरक्षा में स्थानांतरित किया गया है। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा पिछले छह महीनों से की जा रही थी। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। आगे भी सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जाएगी।
Z+ और Z सुरक्षा में क्या है अंतर?
सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव के बाद Z+ और Z सुरक्षा के बीच अंतर भी चर्चा में है। सामान्य तौर पर Z+ श्रेणी में लगभग 55 या उससे अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं, जबकि Z श्रेणी में करीब 22 सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा घेरा होता है। हालांकि, वास्तविक तैनाती संबंधित व्यक्ति के खतरे के आकलन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
बदली परिस्थितियों में पुलिस संसाधनों का होगा बेहतर इस्तेमाल
गौरतलब है कि बस्तर में नक्सली हिंसा के दौरान जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा बड़ी चुनौती रही है। झीरम घाटी नक्सली हमले और भाजपा नेता भीमा मंडावी की हत्या जैसी घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई थी।
अब क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में कमी और सुरक्षा हालात में सुधार को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था का नए सिरे से आकलन किया है। माना जा रहा है कि सुरक्षा में तैनात जवानों और पुलिस संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियों में किया जा सकेगा।

