रायपुर, 21 अगस्त। Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC की वर्ष 2003 की भर्ती परीक्षा एक बार फिर सुर्खियों में है। डिप्टी कलेक्टर और DSP समेत कई पदों पर हुई इस भर्ती में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे थे। अब EOW की जांच और संभावित चालान की खबर के बाद 23 साल पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया है।
उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और अंकों पर उठे सवाल
आरोप है कि 2003 की भर्ती परीक्षा में मुख्य उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और अंकों के आवंटन में अनियमितता हुई। मामले में दावा किया गया कि एक अभ्यर्थी को कथित तौर पर सिर्फ एक पेज लिखने के बावजूद 60 में से 55 अंक दिए गए। वहीं कुछ अभ्यर्थियों द्वारा पूरी उत्तर पुस्तिका लिखे जाने के बाद भी उन्हें 10 से 15 अंक मिलने का दावा किया गया।
RTI के जरिए परीक्षा से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया और मूल्यांकन को लेकर सवाल उठने लगे।
हाईकोर्ट ने दिया था दोबारा जांच का आदेश
मामले में 2016 में बिलासपुर हाईकोर्ट ने दोबारा स्केलिंग करने और कुछ उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच का आदेश दिया था। साथ ही संशोधित मेरिट सूची जारी करने के निर्देश दिए गए थे।
इस आदेश से 2003 की भर्ती के तहत चयनित 147 अधिकारियों की नियुक्तियों पर असर पड़ने की स्थिति बन गई थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के री-स्केलिंग संबंधी आदेश पर रोक लगा रखी है। मामला अभी लंबित है। इसी बीच EOW की जांच के चलते 2003 की PSC भर्ती एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

