रायपुर, 24 अगस्त। ChhattisgarhNews: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सही दिशा दिखाने का सशक्त माध्यम भी है।
मुख्यमंत्री साय ने लेखक करुणा सागर पण्डा को पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषयों पर लिखने के लिए साहस की जरूरत होती है। जब रचनाकार समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को अपनी लेखनी में जगह देते हैं, तो साहित्य सामाजिक चेतना का माध्यम बन जाता है।
छत्तीसगढ़ की साहित्यिक परंपरा का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश ने देश को कई प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं। उन्होंने ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल, मुक्तिबोध और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे साहित्यकारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के लेखक इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समकालीन मुद्दों को समाज के सामने ला रहे हैं।
साय ने कहा कि सिनेमा और साहित्य ने समय-समय पर समाज के संवेदनशील विषयों को सामने रखा है। उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिन विषयों पर रचनाएं सामने आने पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन रचनाकार का दायित्व है कि वह अपनी संवेदना और दृष्टिकोण के साथ विषय को समाज के सामने रखे।
नक्सलवाद की पीड़ा को भी साहित्य में जगह देने की अपील
मुख्यमंत्री ने साहित्यकारों से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। इस दौरान कई परिवारों ने अपनों को खोया, बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई और कई इलाके विकास की मुख्यधारा से दूर रहे।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से जुड़ी मानवीय त्रासदी और बदलते बस्तर की कहानी को साहित्य के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार, सुरक्षा बलों और केंद्र के प्रयासों से बस्तर अब शांति और विकास के नए दौर की ओर बढ़ रहा है।
घरों में लाइब्रेरी बनाने की अपील
मुख्यमंत्री साय ने लोगों से अच्छी पुस्तकों को अधिक से अधिक पढ़ने और घरों में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना जरूरी है। घर की समृद्धि केवल उसकी भव्यता से नहीं, बल्कि वहां मौजूद पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति से भी दिखाई देती है। पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सेतु बनती हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुनील गंगाराम गर्ग ने ‘कोहरा’ को समकालीन विषय पर लिखी गई महत्वपूर्ण कृति बताया। छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि साहित्य सामाजिक प्रश्नों पर सार्थक संवाद और आत्ममंथन का अवसर देता है।
वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने ‘कोहरा’ को साहसिक लेखन का उदाहरण बताते हुए कहा कि साहित्यकारों को समाज के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बात रखने का साहस करना चाहिए। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, जलज कुमार अनुपम सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यकार और बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

