नई दिल्ली, 25 जुलाई। Delhi News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल बन गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने एक-दूसरे को बधाई दी और नाचते-गाते हुए अपनी खुशी जाहिर की। छात्रों का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद सरकार ने जवाबदेही तय की है, जो लोकतंत्र की जीत है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि उन्होंने आखिरकार सरकार को अपनी बात सुनने के लिए मजबूर किया है। उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा जवाबदेही तय करने की दिशा में पहला कदम है, लेकिन उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। सरकार द्वारा उनकी तीनों मांगों को पूरी तरह लागू किए जाने के बाद ही आंदोलन समाप्त माना जाएगा।
छात्रों ने कहा, “यह हमारे लिए बेहद खुशी का पल है, लेकिन यह जवाबदेही तय करने का केवल पहला पड़ाव है। हमने सरकार को झुकाया है। अब सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि जब भी कोई गलत फैसला होगा, हम सवाल पूछने के लिए खड़े रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि अभी केवल शुरुआत हुई है और देश में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर जनता की जवाबदेही तय होनी चाहिए। छात्रों के मुताबिक, महंगाई, बेरोजगारी, ईंधन की गुणवत्ता और बढ़ती कीमतों, महिला सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था जैसे तमाम मुद्दों पर सरकार को जवाब देना होगा। “वन स्टेप एट ए टाइम” के सिद्धांत के साथ वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
‘सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर पूरी हों मांगें’
जब छात्रों से पूछा गया कि क्या अब प्रदर्शन समाप्त हो जाएगा, तो उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी तीनों मांगों पर सहमति जताई है, इसलिए आंदोलन समाप्त होगा। हालांकि, अभी उनकी दो महत्वपूर्ण मांगें केवल कागजों पर हैं। उनका कहना है कि NEET के पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक और व्यापक सुधार किए जाने चाहिए। जब तक इन वादों को जमीन पर लागू नहीं किया जाता, तब तक वे यह नहीं मानेंगे कि उनकी मांगें पूरी तरह स्वीकार की गई हैं।
छात्रों ने कहा, “हमें इस बात की इतनी खुशी है कि उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते। आज हमें एहसास हुआ है कि हमारी आवाज मजबूत है, उसे सुना जा सकता है और सुना जाना भी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार को अब यह समझ लेना चाहिए कि जब-जब कुछ गलत होगा, वे फिर जंतर-मंतर पर खड़े होकर सवाल पूछेंगे और पूरे देश में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे।
सोनम वांगचुक को कहा- बहुत बड़ा धन्यवाद
जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों ने सामाजिक कार्यकर्ता और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि देश के इतने बड़े वैज्ञानिक ने छात्रों की आवाज उठाने के लिए 26 दिनों तक भूख हड़ताल की और सबसे पहले सरकार से जवाब मांगा।
छात्रों ने कहा, “सोनम वांगचुक के जोश और समर्पण को देखकर हममें भी उत्साह आया। हमने महसूस किया कि अपने देश और लोकतंत्र के लिए आगे आना हमारी जिम्मेदारी है। अगर वह हमारे लिए लड़ सकते हैं, तो हम भी अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर सकते हैं।”
छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र में जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

