नई दिल्ली, 07 अक्टूबर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने CSR फंड से जुड़े कथित रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए करीब 200 करोड़ रुपये के CSR फंड को कथित तौर पर इधर-उधर किया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कॉर्पोरेट कंपनियों, PSU, सरकारी बैंकों और अस्पतालों से CSR के नाम पर रकम अलग-अलग ट्रस्टों तक पहुंचाई जाती थी। इसके बाद कमीशन काटकर रकम का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर कैश के रूप में वापस कर दिया जाता था।
धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव पर नेटवर्क चलाने का आरोप
ED के अनुसार, इस कथित नेटवर्क को धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव संचालित कर रहा था। एजेंसी का दावा है कि वह करीब तीन दशक से खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को गुमराह करता रहा और टैक्स-फ्री चैरिटी के नाम पर कई ट्रस्ट बनाए।
आरोप है कि इन्हीं ट्रस्टों के जरिए CSR फंड हासिल किया जाता था और बाद में रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाकर कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी।
CSR फंड को कैश में बदलने का आरोप
जांच में सामने आया है कि कॉर्पोरेट संस्थानों से ट्रस्टों को CSR योगदान दिलाया जाता था। इसके बाद एक निश्चित कमीशन काटकर बाकी रकम कथित तौर पर संबंधित पक्षों को नकद वापस कर दी जाती थी।
ED का कहना है कि CSR फंड जारी कराने के लिए कुछ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत दिए जाने की भी जांच की जा रही है।
चार राज्यों और दिल्ली-NCR में 8 ठिकानों पर छापे
ED ने 1 अक्टूबर को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में कुल 8 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान PSU अधिकारियों और कॉर्पोरेट अस्पतालों से जुड़े दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारी जब्त की गई।
जांच के दौरान करीब 21 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद होने की बात भी सामने आई है। अब एजेंसी जब्त दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के जरिए CSR फंड के पूरे लेन-देन की पड़ताल कर रही है।
एजेंटों और बिचौलियों के नेटवर्क की जांच
तलाशी में ED को कथित तौर पर एजेंटों और बिचौलियों के नेटवर्क की जानकारी मिली। आरोप है कि ये लोग कंपनियों और PSU से CSR फंड ट्रस्टों तक पहुंचाने में मदद करते थे।
एजेंसी के मुताबिक, इसके बाद ट्रस्टों में आई रकम को कथित शेल कंपनियों और अलग-अलग बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था। इनमें से कुछ कंपनियां GST धोखाधड़ी से जुड़ी जांच में भी संदिग्ध रही हैं।
40 PSU और सरकारी बैंकों के CSR फंड की जांच
ED के अनुसार, कम से कम 40 PSU और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने आरोपियों से जुड़े ट्रस्टों को CSR डोनेशन दिया था। अब इन सभी योगदानों और उनसे जुड़े लेन-देन की जांच की जा रही है।
एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि जिन परियोजनाओं के लिए CSR फंड जारी किया गया, वे वास्तव में पूरी हुईं या नहीं। जांच में कुछ परियोजनाओं के अधूरे रहने और वेंडरों के बिल कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जाने की आशंका सामने आई है।
कागजों पर ज्यादा खर्च, जमीन पर कम काम का आरोप
जांच एजेंसी को संदेह है कि कुछ CSR परियोजनाओं में दस्तावेजों पर खर्च ज्यादा दिखाया गया, जबकि वास्तविक काम उस अनुपात में नहीं हुआ। अतिरिक्त रकम को कथित तौर पर फर्जी या शेल कंपनियों के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया।
फिलहाल ED PSU अधिकारियों, कॉर्पोरेट संस्थानों, ट्रस्ट संचालकों, बिचौलियों और कथित शेल कंपनियों के बीच संबंधों की जांच कर रही है। एजेंसी बैंक खातों, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए कथित मनी ट्रेल को जोड़ने में जुटी है।

