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Jhiram Ghati Case: झीरम घाटी मामले में NIA कोर्ट के फैसले का विरोध… हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी

जगदलपुर, 19 सितंबर। Jhiram Ghati Case: झीरम घाटी हत्याकांड मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद आदिवासी समाज के एक वर्ग ने फैसले पर असंतोष जताया है। 16 सितंबर को अदालत ने मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। दोषियों को फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।

जगदलपुर के परपा में आदिवासी समाज की बैठक हुई, जिसमें बस्तर संभाग के करीब 6 से 7 जिलों के प्रतिनिधि और मामले में सजा पाए लोगों के परिजन शामिल हुए। बैठक में समाज के लोगों ने दावा किया कि सजा पाए लोग झीरम घाटी की घटना में शामिल नहीं थे। हालांकि, ये दावे समाज और प्रभावित परिवारों की ओर से किए गए हैं।

हाईकोर्ट में अपील की तैयारी

बैठक में फैसला लिया गया कि NIA कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। समाज का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली बैठकों में शामिल होना अपने आप में नक्सली गतिविधि में शामिल होने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

समाज ने आगे की कानूनी लड़ाई के लिए गांव-गांव और परिवारों से चंदा जुटाने का भी फैसला लिया है। इसके तहत प्रत्येक परिवार से 20 रुपये लिए जाने की बात कही गई है। जरूरत पड़ने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की भी बात कही गई है।

समाज ने उठाए जांच पर सवाल

सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि प्रभावित परिवारों के साथ हुई बैठक में लोगों ने दावा किया कि सजा पाए उनके परिजन घटना के दौरान वहां मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि समाज इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।

वहीं, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष गंगा नाग ने भी कहा कि प्रभावित परिवारों से चर्चा के बाद समाज ने दोषियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। समाज का कहना है कि मामले में घटना के पीछे मौजूद अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

झीरम घाटी मामले में NIA की विशेष अदालत ने 5 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था और 16 सितंबर को सभी 10 को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अब इस फैसले के खिलाफ प्रस्तावित अपील से मामले की कानूनी लड़ाई अगले चरण में पहुंच सकती है।

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