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Krishna Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्मभूमि से बांके बिहारी तक जन्माष्टमी की धूम… भक्तिमय हुआ ब्रज

Mathura: Devotees offer prayers to Lord Krishna and Goddess Radha at Bhagwat Bhawan of Sri Krishna Janmasthan Temple on the occasion of the Janamshtami festival, in Mathura, Monday, Aug. 26, 2024. (PTI Photo) (PTI08_26_2024_000008B)

रायपुर, 04 सितम्बर। Krishna Janmashtami: देशभर में आज भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और उनकी बाल लीलाओं से जुड़ी वृंदावन नगरी में इस पर्व की अलग ही रौनक देखने को मिल रही है। मंदिरों को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और विशेष सजावट से सजाया गया है। चारों तरफ भजन, कीर्तन और भगवान कृष्ण के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।

जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में भक्त जन्माष्टमी को धूम धाम से मनाया जा रहा हैं । मंदिरों में सुबह से ही दर्शन और पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी है। रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाएगा।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में आधी रात को जन्मोत्सव

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में जन्माष्टमी का सबसे खास आकर्षण मध्यरात्रि का जन्मोत्सव होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था। इसी मान्यता के अनुसार मंदिर में मध्यरात्रि के समय विशेष पूजा, अभिषेक और आरती के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है।

जन्मभूमि मंदिर में इस खास पल को देखने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। मंदिर परिसर में कृष्ण जन्म से जुड़ी झांकियां भी लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं।

द्वारकाधीश मंदिर में विशेष श्रृंगार और झांकियां

मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर भी जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। भगवान कृष्ण का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उनके जीवन से जुड़ी झांकियां सजाई जाती हैं।

जन्माष्टमी की रात यहां विशेष पूजा और जन्मोत्सव के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

बांके बिहारी मंदिर में साल में एक बार मंगला आरती

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी की खास परंपरा मंगला आरती है। आम दिनों में यहां मंगला आरती नहीं होती, लेकिन जन्माष्टमी के अवसर पर साल में एक बार यह विशेष आरती आयोजित की जाती है।

मंगला आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त रात में ही मंदिर पहुंचते हैं। कृष्ण जन्म के बाद विशेष अभिषेक और आरती की जाती है। इसके अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाता है, जिसमें भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी में भक्त भजन-कीर्तन करते हैं और प्रसाद व मिठाइयां बांटते हैं।

इस्कॉन मंदिर में भजन-कीर्तन से गूंजेगा वृंदावन

वृंदावन का कृष्ण-बलराम मंदिर (इस्कॉन) भी जन्माष्टमी के मौके पर भक्तों से गुलजार रहता है। यहां भजन, कीर्तन, पूजा और भगवान कृष्ण के विशेष दर्शन का आयोजन किया जाता है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होते हैं।

प्रेम मंदिर में रोशनी और भव्य सजावट

वृंदावन का प्रेम मंदिर भी जन्माष्टमी के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर की भव्य सजावट और रोशनी लोगों को आकर्षित कर रही है। यहां रात 9 बजे से 1 बजे तक भजन-कीर्तन, अभिषेक, भोग, आरती और झूले सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पूरे देश में कृष्ण भक्ति की गूंज

जन्माष्टमी के अवसर पर  मंदिरों के साथ-साथ बाजारों और प्रमुख मार्गों पर भी उत्सव का माहौल है। जगह-जगह भगवान कृष्ण की झांकियां सजाई गई हैं। श्रद्धालु ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे लगाते हुए मंदिरों में पहुंच रहे हैं।

मथुरा से लेकर वृंदावन तक जन्माष्टमी का यह पर्व भगवान कृष्ण के जन्म, उनकी बाल लीलाओं और ब्रज की धार्मिक परंपराओं को जीवंत कर रहा है। मध्यरात्रि में कृष्ण जन्म के साथ ही पूरा ब्रज क्षेत्र एक बार फिर कान्हा के जन्म की खुशी में सराबोर नजर आएगा।

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