रायपुर, 07 नवम्बर। Narak Chaturdashi 2026: दीपावली से ठीक एक दिन पहले नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है, जिसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ने वाले इस पर्व का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, भगवान शिव, प्रभु श्रीराम, हनुमान जी और माता काली की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी की शाम यमराज के निमित्त दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी शुभ माना जाता है। वहीं, कुछ ऐसे काम हैं जिन्हें करने से बचना चाहिए।
छोटी दिवाली पर क्या करना चाहिए?
नरक चतुर्दशी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सरसों के तेल से मालिश करने और स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। इस दिन माता काली की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।
छोटी दिवाली पर घर के अलग-अलग स्थानों पर 14 दीपक जलाने की परंपरा है। इसके साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। शाम के समय यमराज के नाम से दीपदान करना भी इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। धार्मिक विश्वास है कि इससे परिवार के सदस्यों पर यमराज की कृपा बनी रहती है।
नरक चतुर्दशी पर इन कामों से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली के दिन मांसाहार और मदिरा समेत तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। साथ ही बाल और नाखून काटने से भी परहेज करने की परंपरा है।
इस दिन घर की दक्षिण दिशा को गंदा नहीं रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा का संबंध यमराज से माना जाता है। इसके अलावा पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं को परेशान करने या नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। छोटी दिवाली पर सभी जीवों के प्रति दया और प्रेम का भाव रखने की सलाह दी जाती है।
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