नई दिल्ली, 27 अगस्त। Nepal Floods: नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने कुछ ही घंटों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत की खबर है। इनमें नेपाल में 157 और तिब्बत क्षेत्र में 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल में सेना, पुलिस और राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चला रही हैं। पहाड़ी क्षेत्र में तेज बहाव, मलबे, खराब मौसम और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण राहत कार्यों में काफी दिक्कतें आ रही हैं। कई इलाकों में हेलीकॉप्टरों की पहुंच भी मुश्किल बनी हुई है।
फ्लैश फ्लड से मची तबाही
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने के कारण अचानक आई बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड से यह तबाही हुई है। इसका असर नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी देखने को मिला है।
बाढ़ का पानी आगे गांडक नदी तंत्र में पहुंचने की आशंका को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। दोनों राज्यों में प्रशासन संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
अमित शाह ने CM से की बात
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाने और संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
भारतीय नागरिक और श्रद्धालु भी लापता
लापता लोगों में भारतीय नागरिकों के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कई विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के प्रभावित क्षेत्रों में फंसे या लापता होने की सूचना है।
PM मोदी ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत की और बाढ़ में हुई जनहानि पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में भारत नेपाल के साथ खड़ा है और हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है।
भारत की ओर से शुरुआती राहत सहायता में अस्थायी आश्रय, कंबल, सोलर लैंप और जरूरी दवाइयां शामिल हैं। इनका उद्देश्य आपदा प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाना है।
फिलहाल राहत और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और संभावित दूसरी बाढ़ या भूस्खलन के खतरे से लोगों को बचाना है। अधिकारियों ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

