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PM मोदी के इंडोनेशिया दौरे का बड़ा असर, रक्षा से शिक्षा तक कई क्षेत्रों में हुए समझौते

Several important agreements were signed between India and Indonesia on the second day of Prime Minister Narendra Modi's visit to Indonesia. Prime Minister Modi held bilateral talks with Indonesian President Prabowo Subianto, during which

PM Modi

नई दिल्ली, 07 जुलाई| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दूसरे दिन भारत और इंडोनेशिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें रक्षा, कृषि, खनिज, स्वास्थ्य, तकनीक और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया। पीएम मोदी ने इसे 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान बताते हुए कहा कि भारत और इंडोनेशिया की रणनीतिक साझेदारी अब नए दौर में प्रवेश कर रही है।

रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई। सबसे बड़ी घोषणा इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति को लेकर हुई। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का फैसला लिया।

कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में समझौते

कृषि क्षेत्र में भारत इंडोनेशिया को उन्नत गेहूं के बीज उपलब्ध कराएगा। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय दवाओं की आसान उपलब्धता और चिकित्सा कर्मियों के प्रशिक्षण को लेकर भी सहमति बनी।

AI और डिजिटल तकनीक में साझेदारी

तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेलीकॉम, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप सहयोग को बढ़ाने का निर्णय लिया है।

शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए इंडोनेशिया में IIM बेंगलुरु का कैंपस खोलने की योजना पर सहमति बनी है।

खनिज और औद्योगिक सहयोग पर भी जोर

भारत और इंडोनेशिया ने स्टील सप्लाई चेन, खनिज क्षेत्र और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भी समझौते किए हैं। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भी आपसी तालमेल बढ़ाने पर सहमति जताई।

प्रधानमंत्री मोदी की यह 2018 के बाद इंडोनेशिया की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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