Site icon AB News24.in

PM Modi: PM मोदी ने न्यूजीलैंड के PM को भेंट की बस्तर की ढोकरा कला

Another significant milestone has been achieved towards gaining global recognition for India's rich cultural heritage. Prime Minister Narendra Modi has congratulated New Zealand Prime Minister Christopher

PM Modi

रायपुर, 14 जुलाई| PM Modi: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को छत्तीसगढ़ के बस्तर की विश्वविख्यात ढोकरा ‘ट्री ऑफ लाइफ’ धातु शिल्पकृति भेंट की। इस विशेष कूटनीतिक उपहार के जरिए बस्तर की पारंपरिक जनजातीय कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है।

प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को उपहार के रूप में बस्तर की ढोकरा कला का चयन छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। यह शिल्पकृति राज्य की जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक हस्तशिल्प और लोककला की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बन गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। कलाकारों और शिल्पकारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज बस्तर की ढोकरा कला वैश्विक कूटनीतिक उपहार का हिस्सा बनी है।

संस्कृति विभाग भी लोककला, जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए लगातार पहल कर रहा है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में विभाग कलाकारों को प्रोत्साहित करने और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व स्तर तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

बस्तर की ढोकरा कला विश्व की सबसे प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसे लॉस्ट वैक्स कास्टिंग (मोम सांचा ढलाई) तकनीक से तैयार किया जाता है। हर शिल्पकृति पूरी तरह हस्तनिर्मित होती है, जिससे प्रत्येक कलाकृति अपनी बनावट और कलात्मकता में अलग पहचान रखती है।

‘ट्री ऑफ लाइफ’ शिल्पकृति भारतीय संस्कृति में प्रकृति, समृद्धि और जीवन के संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। यह भारतीय ‘कल्पवृक्ष’ की अवधारणा के साथ-साथ न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय की ‘व्हाकापापा’ परंपरा से भी सामंजस्य स्थापित करती है, जो प्रकृति और जीवन के गहरे संबंध को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री द्वारा इस शिल्पकृति को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक उपहार के रूप में चुने जाने से बस्तर के शिल्पकारों का उत्साह बढ़ेगा, स्थानीय हस्तशिल्प को नए बाजार मिलेंगे और छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय कला एवं संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

Exit mobile version