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विकास के दावों पर सवाल: झोपड़ी में आंगनबाड़ी… कमरभर पानी पार कर स्कूल जाते बच्चे

गरियाबंद, 08 अगस्त। गरियाबंद जिले के आदिवासी इलाकों में विकास योजनाओं के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर इनका लाभ जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। सरकारी स्वीकृति मिलने के बावजूद कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। इससे ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कई इलाकों में आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण अधूरा होने के कारण बच्चों की कक्षाएं झोपड़ियों में संचालित की जा रही हैं। बारिश के मौसम में यहां बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

वहीं, कई गांवों में पुल-पुलिया नहीं होने से स्कूली बच्चों को उफनते नालों और कमर तक पानी से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है। बारिश के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि योजनाओं के लिए राशि स्वीकृत होने के बाद भी निर्माण कार्य समय पर पूरे नहीं किए जा रहे हैं। निर्माण एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों और बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने अधूरे निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने और व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि इन आश्वासनों के बाद जमीनी स्थिति में कितना बदलाव आता है।

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