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Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला… स्कूलों में जंक फूड की बिक्री पर सख्ती

जयपुर, 25 अगस्त। Rajasthan High Court: बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के तरीके को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्कूलों में जंक फूड की बिक्री पर सख्ती करते हुए कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस-फैट वाले बेकरी उत्पाद और ज्यादा फैट, शुगर व नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने को कहा है।

मुख्य पीठ के जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए ये अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि स्कूल कैंटीन के अलावा स्कूल गेट के 50 मीटर के दायरे में भी हाई फैट, शुगर और साल्ट वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं होनी चाहिए।

हर स्कूल में बनेगी फूड सेफ्टी कमेटी

हाईकोर्ट ने सभी स्कूलों में चार सप्ताह के भीतर स्कूल फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

इसके अलावा स्कूल कैंटीन में मिलने वाले खाद्य पदार्थों की कैलोरी, सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी आठ सप्ताह के भीतर प्रदर्शित करनी होगी। बच्चों और अभिभावकों को खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी आसानी से समझाने के लिए ‘ट्रैफिक लाइट लेबलिंग’ अपनाने पर भी जोर दिया गया है।

नियमित निरीक्षण से होगी निगरानी

जंक फूड की बिक्री पर रोक के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने होंगे। कोर्ट ने स्कूलों में बच्चों को जंक फूड से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करने और स्वस्थ भोजन के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया है।

AI जरूरी, लेकिन किताब और कलम भी जरूरी

हाईकोर्ट ने शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि AI आधुनिक शिक्षा के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे मानव बुद्धि का विकल्प नहीं बल्कि सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने बच्चों की हस्तलेखन, किताब पढ़ने, नोट्स बनाने, स्वतंत्र सोच, विश्लेषण और मौलिक लेखन जैसी क्षमताओं को बनाए रखने पर जोर दिया। शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल लर्निंग के साथ हस्तलिखित कार्य, किताबों का अध्ययन और लिखित परीक्षाओं को भी महत्व देने की आवश्यकता बताई गई।

हाईकोर्ट के इन निर्देशों का उद्देश्य बच्चों के लिए स्वस्थ खान-पान का वातावरण तैयार करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और पारंपरिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है।

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