रायपुर, 09 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को सरल बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन करते हुए नेगेटिव लिस्ट मॉडल लागू किया है। इस नई व्यवस्था से शहरी क्षेत्रों में जरूरी सुविधाओं के विकास, निवेश और कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में किए गए इन बदलावों का उद्देश्य भूमि उपयोग से जुड़े नियमों को अधिक सरल और लचीला बनाना है। इससे नियमों के पालन में आने वाली अनावश्यक परेशानियां कम करने और विकास कार्यों को गति देने में मदद मिल सकती है।
आवासीय क्षेत्रों में अस्पताल और स्कूल जैसी सुविधाओं को अनुमति
नई व्यवस्था के तहत आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और कार्यालय जैसी गतिविधियों को अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है। इससे लोगों को अपने घरों के आसपास शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के अवसर बढ़ेंगे।
वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी और श्रमिक आवास जैसी सुविधाओं को भी अनुमति दी गई है। इससे उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों को कार्यस्थल के नजदीक रहने की सुविधा मिल सकती है।
नेगेटिव लिस्ट मॉडल के तहत प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची स्पष्ट होगी। इसके अलावा अन्य गतिविधियों के लिए नियमों के दायरे में अधिक लचीलापन मिलेगा। हालांकि, भूमि उपयोग और निर्माण से संबंधित लागू शर्तों का पालन करना जरूरी होगा।
केंद्र सरकार से मिले 885 करोड़ रुपये
शहरी नियोजन सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ को केंद्र सरकार की विशेष सहायता योजना के तहत दो वित्तीय वर्षों में कुल 885 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये और 2025-26 में 85 करोड़ रुपये की सहायता शामिल है।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि भूमि विकास नियमों में किए गए इन बदलावों से शहरी सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करने तथा शहरों के विकास को गति देने में मदद मिलेगी।


