रायपुर, 17 जुलाई| Chhattisgarh Vidhansabha Monsoon Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सदन में प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे।
राज्य गठन के बाद यह किसी भी सरकार के खिलाफ लाया गया 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले नौ बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन किसी भी सरकार को सत्ता से हटाया नहीं जा सका। विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी बहस वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ हुए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी।
कांग्रेस इस बार नकटी गांव बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों का पक्ष सदन में रखेगी।
विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक, कांग्रेस के 35 विधायक और एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का है। ऐसे में संख्या बल भाजपा के पक्ष में होने से प्रस्ताव के पारित होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है, हालांकि राजनीतिक दृष्टि से यह बहस अहम मानी जा रही है।
विधानसभा के इतिहास में पहली बार वर्ष 2002 और 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ पांच बार और भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाए गए, लेकिन हर बार सरकार बहुमत साबित करने में सफल रही।
वही, मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल में भी कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सहकारिता तथा महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े सवालों पर सरकार जवाब देगी। विपक्ष महतारी वंदन योजना, धान खरीदी, राशन व्यवस्था और मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समेत कई विषयों पर सरकार को घेरेगा।
इससे पहले शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कथित फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर उद्योग स्थापना का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मामले की पुलिस जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


