रायपुर, 11 अगस्त। CG Hareli Tihar: छत्तीसगढ़ का पारंपरिक और प्रमुख पर्व हरेली तिहार 12 अगस्त को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास को पारंपरिक और ग्रामीण थीम पर सजाया जा रहा है। मुख्यमंत्री निवास में गांव के मेलों की तरह झूले लगाए जा रहे हैं। हरेली कार्यक्रम में पहुंचने वाले नेता और VIP भी गेड़ी चढ़ते और पारंपरिक झूलों का आनंद लेते नजर आएंगे।
लोक कलाकार देंगे छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक
हरेली तिहार के आयोजन में स्थानीय लोक कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे। कलाकार छत्तीसगढ़ी लोकगीतों और पारंपरिक कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश की लोक संस्कृति की झलक पेश करेंगे। मुख्यमंत्री निवास की सजावट भी इसी ग्रामीण थीम को ध्यान में रखकर की जा रही है।
भूपेश बघेल के रायपुर निवास में भी होगा आयोजन
हरेली पर्व के मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित निवास में भी बुधवार दोपहर 12 बजे हरेली तिहार का आयोजन किया जाएगा। इसमें कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति और पारंपरिक परंपराओं को दर्शाया जाएगा।
मुख्यमंत्री निवास में बड़े स्तर पर हरेली तिहार मनाने की परंपरा की शुरुआत भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुई थी।
क्या है गेड़ी?
हरेली तिहार में गेड़ी का खास महत्व है। इसे आमतौर पर बांस से तैयार किया जाता है। बांस में अलग-अलग ऊंचाई पर पैर रखने के लिए लकड़ी के पउआ लगाए जाते हैं। इन पर चढ़कर लोग गेड़ी चलाते हैं। हरेली के मौके पर गेड़ी चढ़ना छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति का हिस्सा है।
नीम की डाली लगाने और पशुधन को औषधीय लोंदी खिलाने की परंपरा
हरेली पर्व पर गांवों में घरों के दरवाजे पर नीम की डालियां लगाने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार इससे नकारात्मकता और बीमारियों से बचाव होता है। लोहार भी अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए घरों की चौखट पर कील लगाते हैं।
इस दिन पशुधन के अच्छे स्वास्थ्य के लिए उन्हें औषधीय सामग्री से तैयार आटे की लोंदी खिलाई जाती है। वहीं यादव समाज के लोग जंगल से कंद-मूल और वनौषधियां लाकर ग्रामीणों को उपलब्ध कराते हैं। कई स्थानों पर सहाड़ादेव और ठाकुरदेव के पास जड़ी-बूटियां उबालकर किसानों को दी जाती हैं। इसके बदले ग्रामीण चावल, दाल जैसी चीजें उपहार के रूप में देते हैं।
हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की कृषि, ग्रामीण जीवन और लोक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें प्रकृति, पशुधन और खेती के प्रति आस्था दिखाई देती है।


