Surajpur Murder Case: 3 दोषियों को फांसी कब? सूरजपुर हत्याकांड में अब आगे क्या होगा

Surajpur Murder Case: 3 दोषियों को फांसी कब? सूरजपुर हत्याकांड में अब आगे क्या होगा

रायपुर, 19 अक्टूबर। Surajpur Murder Case: छत्तीसगढ़ के चर्चित सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाने वाले तीन दोषियों कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह को रायपुर केंद्रीय जेल शिफ्ट कर दिया गया है। प्रदेश में फांसी देने की व्यवस्था रायपुर केंद्रीय जेल में है, लेकिन तीनों दोषियों को फांसी कब होगी, इसे लेकर अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है। मृत्युदंड पर अमल से पहले कई कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी है।

हाईकोर्ट करेगा मृत्युदंड की पुष्टि

8 अक्टूबर 2026 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया था। जेल अधीक्षक योगेश क्षत्री के मुताबिक, सजा की पुष्टि के लिए मामले के रिकॉर्ड हाईकोर्ट भेजे जाएंगे। हाईकोर्ट मामले की सुनवाई और फैसले की समीक्षा के बाद मृत्युदंड को बरकरार रख सकता है, सजा कम कर सकता है या दोषसिद्धि को रद्द कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में अपील और दया याचिका का विकल्प

हाईकोर्ट से मृत्युदंड की पुष्टि होने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने और नियमानुसार समीक्षा याचिका तथा क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने का विकल्प रहता है। इसके अलावा वे राज्यपाल और राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भी दाखिल कर सकते हैं।

इन सभी कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही मृत्युदंड पर अमल को लेकर आगे की कार्रवाई संभव होगी। इसलिए फिलहाल फांसी की तारीख को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

छत्तीसगढ़ में 1978 के बाद नहीं हुई फांसी

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में आखिरी बार वर्ष 1978 में रायपुर केंद्रीय जेल में बैजू उर्फ रामभरोसा को फांसी दी गई थी। इसके बाद प्रदेश में किसी अन्य दोषी को फांसी दिए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जाता है कि पिछले 12 वर्षों में छह दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई, लेकिन उन मामलों में सजा पर अमल नहीं हुआ।

कानूनी प्रक्रिया पर टिकी नजरें

सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में तीनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। हाईकोर्ट में सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट में संभावित अपील और दया याचिकाओं जैसे विकल्पों के कारण इस प्रक्रिया में समय लग सकता है।

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