बिलासपुर, 02 नवम्बर। Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। बिलासपुर के कर्मचारी भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में संघ ने महंगाई भत्ता, अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारियों की वेतनवृद्धि, शिक्षकों की टीईटी परीक्षा और एलबी संवर्ग के शिक्षकों को पेंशन का लाभ देने सहित कई मुद्दे उठाए।
संघ का कहना है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता देय तिथि से मिलना चाहिए। लेकिन राज्य सरकार ने एक जनवरी 2026 के बजाय एक नवंबर 2026 से 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा की है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी है। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान अन्य कर्मचारी संगठनों के साथ मिलकर आक्रोश रैली निकाली जाएगी।
अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारियों की वेतनवृद्धि का मुद्दा
संघ के प्रांताध्यक्ष पवन कुमार शर्मा ने बताया कि वर्ष 2013 से 2023 के बीच अनुकंपा नियुक्ति के तहत सहायक ग्रेड-3 के पद पर भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए कौशल परीक्षा पास करने की शर्त रखी गई थी। लेकिन इस दौरान परीक्षा आयोजित नहीं की गई। इसके बावजूद कर्मचारियों को वेतनवृद्धि का लाभ नहीं दिया गया। कुछ मामलों में वेतन की वसूली भी की गई।
उन्होंने कहा कि परीक्षा आयोजित नहीं करना शासन की जिम्मेदारी थी, इसलिए कर्मचारियों को इसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए। इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत दी है। अब संघ चाहता है कि सभी पात्र कर्मचारियों को वेतनवृद्धि का लाभ देने के लिए शासन एक समान और स्थायी आदेश जारी करे।
टीईटी परीक्षा ऑफलाइन कराने की मांग
संघ ने शिक्षकों की टीईटी परीक्षा ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन कराने की मांग की है। इसके साथ ही एलबी संवर्ग के शिक्षकों की सेवा गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करने और उसी आधार पर पेंशन का लाभ देने की मांग भी उठाई गई।
सितंबर में भी कर चुके हैं हड़ताल
संघ के जिला अध्यक्ष किशोर शर्मा ने बताया कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। सितंबर में महंगाई भत्ते और 11 सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल भी की गई थी, लेकिन अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने का वादा किया गया था। सरकार को कर्मचारियों के हित में जल्द फैसला लेना चाहिए। मांगें पूरी नहीं होने पर शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान अन्य कर्मचारी संगठनों से चर्चा कर एक दिवसीय आक्रोश रैली निकाली जाएगी।


