Anti Paper Leak Bill: पेपर लीक पर सरकार सख्त… 10 साल की जेल और ₹50 लाख जुर्माने का प्रस्ताव

Anti Paper Leak Bill: पेपर लीक पर सरकार सख्त… 10 साल की जेल और ₹50 लाख जुर्माने का प्रस्ताव

नई दिल्ली, 27 जुलाई। Anti Paper Leak Bill: केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों पर सख्ती बढ़ाने के लिए सोमवार को लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक सदन में पेश किया। हालांकि, विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण इस पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी।

सरकार का कहना है कि संशोधित कानून का उद्देश्य पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाना है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत दोषियों के लिए सजा और जुर्माने के प्रावधान पहले से अधिक कठोर किए गए हैं।

10 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना

विधेयक के अनुसार, पेपर लीक या सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों को कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही ₹50 लाख तक जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

वहीं, यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है, तो दोषियों को कम से कम 7 वर्ष की सजा और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

दो महीने में जांच, तीन महीने में मुकदमे के निपटारे का प्रस्ताव

प्रस्तावित कानून में पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव है, ताकि चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमों का निपटारा किया जा सके।

विपक्ष के हंगामे के बीच पेश हुआ विधेयक

विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसद 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगते हुए नारेबाजी कर रहे थे। हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।

सरकार ने विपक्ष से की चर्चा में शामिल होने की अपील

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से हंगामा छोड़कर विधेयक पर चर्चा में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह कानून छात्रों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है और संसद में इस पर खुली चर्चा होनी चाहिए।

उधर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सरकार और विपक्ष के नेताओं से बातचीत कर सहमति बनाने की कोशिश की। सरकार का कहना है कि यदि सहमति नहीं बनती है, तब भी वह विधेयक को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रखेगी।

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