Bastar Dussehra: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बस्तर दशहरा-2026 का न्योता… सांसद महेश कश्यप ने दिया आमंत्रण

Bastar Dussehra: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बस्तर दशहरा-2026 का न्योता… सांसद महेश कश्यप ने दिया आमंत्रण

रायपुर, 09 अक्टूबर। Bastar Dussehra: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में बस्तर सांसद महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति, जगदलपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा-2026 में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। बस्तर की परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री को पारंपरिक पागा पहनाकर सम्मानित भी किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार जताते हुए बस्तर दशहरा के सफल आयोजन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की अनमोल विरासत है। यह पर्व बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को दर्शाता है। राज्य सरकार इस समृद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

75 दिनों तक चलती है बस्तर दशहरा की परंपरा

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, धार्मिक अनुष्ठानों और इस वर्ष की तैयारियों की जानकारी दी। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलने वाला अनूठा सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। इसकी शुरुआत हरेली अमावस्या से होती है और विभिन्न पूजा-विधानों के साथ यह आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तक चलता है।

इस वर्ष 12 अगस्त को पाटजात्रा पूजा विधान के साथ पर्व की शुरुआत हुई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा, 18 अक्टूबर को बेल पूजा और 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा। पर्व के विभिन्न अनुष्ठानों में बस्तर के अलग-अलग समुदायों की महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है।

मां दंतेश्वरी की आराधना है पर्व की खास पहचान

बस्तर दशहरा देश के अन्य दशहरा उत्सवों से अलग है। यहां यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के रूप में नहीं, बल्कि आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा और आराधना के महापर्व के रूप में मनाया जाता है।

इसकी ऐतिहासिक परंपरा चालुक्य नरेश पुरुषोत्तम देव से भी जुड़ी हुई है। मान्यता है कि पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की यात्रा के दौरान उन्हें ‘रथपति’ की उपाधि प्राप्त हुई थी। इसी परंपरा के कारण बस्तर दशहरा में रथ का विशेष महत्व है।

पर्व के आयोजन में मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन सहित विभिन्न समुदायों की जिम्मेदारियां परंपरागत रूप से तय हैं। रथ निर्माण से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य व्यवस्थाओं तक स्थानीय समुदाय सक्रिय भूमिका निभाते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का अनूठा उदाहरण है।

देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है बस्तर दशहरा

भव्य रथयात्रा, विशिष्ट पूजा-अनुष्ठानों और जनजातीय लोक संस्कृति के कारण बस्तर दशहरा देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक पर्व को करीब से देखने पहुंचते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की संस्कृति छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर है। बस्तर दशहरा जैसी परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करना और देश-दुनिया तक पहुंचाना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में सांसद महेश कश्यप के साथ मंगलु मांझी, बलराम मांझी, पदम् चालकी, समारू चालकी, डमरू चालकी, लक्ष्मण मांझी सहित अनेक मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन और बस्तर दशहरा समिति के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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