रायपुर, 16 जुलाई। CG News: छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को लेकर नया धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 लागू हो गया है। राज्य सरकार की अधिसूचना के बाद यह कानून 10 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है। नए कानून का उद्देश्य बल, प्रलोभन, दबाव या धोखे से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है।
कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति बल, लालच, प्रलोभन या छल-कपट के जरिए किसी का धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसके खिलाफ कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। महिलाओं, नाबालिगों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में सजा और अधिक कठोर होगी।
नए अधिनियम के अनुसार, धर्म परिवर्तन करने से 60 दिन पहले संबंधित जिला कलेक्टर को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा, ताकि प्रशासन मामले की जांच कर सके। इसके अलावा केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किए गए विवाह को भी कानून के तहत अमान्य माना जाएगा।
धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए जिलों में विशेष अदालतें गठित की जाएंगी। कानून में यह भी प्रावधान है कि ऐसे मामलों का तय समय सीमा के भीतर निपटारा किया जाए। सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में और भी कड़े दंड और भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित करना नहीं, बल्कि दबाव, धोखे या प्रलोभन के जरिए होने वाले अवैध धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है।


