रायपुर, 06 अक्टूबर। Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के गांवों को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ शुरू किया है। यह पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले व्यक्ति या संस्था को दिया जाएगा।
पुरस्कार के तहत चयनित विजेता को 1 लाख रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। इसका उद्देश्य गांवों की संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक धरोहर और स्थानीय जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्रामीण पर्यटन के जरिए स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला और सामुदायिक पर्यटन को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।
‘चेन्दरू’ नाम बस्तर और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान से जुड़ा है। इसी नाम से अब ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाएगा।
पुरस्कार के लिए छह सदस्यीय जूरी प्रविष्टियों का मूल्यांकन करेगी। इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी, रोजगार सृजन, किए गए काम का प्रभाव और संस्कृति व प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को देखा जाएगा। किसी व्यक्ति को यह पुरस्कार जीवनकाल में केवल एक बार दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित करेगा। आवेदकों को अपनी प्रोफाइल, फोटो, स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड और ग्रामीण पर्यटन से जुड़े काम व उपलब्धियों के प्रमाण देने होंगे।
चयनित विजेता को राज्योत्सव में सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही उनके काम और उपलब्धियों पर आधारित सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण पर्यटन को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था, संस्कृति के संरक्षण और सतत विकास से जोड़ना है।


