रायपुर, 12 अगस्त। Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ का पहला लोक पर्व हरेली तिहार बुधवार को पूरे उत्साह और पारंपरिक अंदाज में मनाया गया। नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास हरेली के रंग में रंगा नजर आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधि-विधान से भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी बारिश, भरपूर फसल, किसानों की समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
पारंपरिक वेशभूषा में पिंक ऑटो से पहुंचे CM
हरेली कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। वे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक संगीता यादव के पिंक ऑटो में कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में नजर आए।
कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश और नवग्रह पूजन से हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने शिवलिंग का अभिषेक किया और नांगर, रापा, कुदाल व फावड़ा समेत कृषि उपकरणों की पूजा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को भी नमन किया।

गौमाता को खिलाई लोंदी, पशुधन संरक्षण का संदेश
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री निवास की गौशाला पहुंचकर गौमाता की पूजा और आरती की। उन्होंने गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ और पारंपरिक लोंदी खिलाई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में पशुधन का महत्वपूर्ण स्थान है और हमारी परंपराएं पशुओं के सम्मान व संरक्षण का संदेश देती हैं।

किसानों की समृद्धि पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की आर्थिक मजबूती सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि राज्य में किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की जा रही है। इसके साथ ही सिंचाई, फसल बीमा और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने पर भी काम किया जा रहा है।
हार्वेस्टर सब्सिडी का चेक और ड्रोन दीदी से संवाद
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने रायपुर के किसान इंद्र कुमार वर्मा को हार्वेस्टर पर मिलने वाली सब्सिडी के रूप में 16 लाख रुपए का चेक प्रदान किया।
वहीं, ड्रोन दीदी चंद्रकली वर्मा से संवाद कर उनकी सफलता की सराहना की। चंद्रकली ने बताया कि वे ड्रोन से खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव करती हैं। अब तक वे 2,500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं और करीब 7 लाख रुपए की आय अर्जित कर चुकी हैं।
गेड़ी, बिल्लस और लोकगीतों ने बांधा समां
मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी, बिल्लस, गोटी, बाटी और रहचुली जैसे पारंपरिक खेल आकर्षण का केंद्र रहे। मांदर, ढोलक और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी गीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री साय भी कलाकारों के बीच पहुंचे और लोकधुनों पर उनके साथ झूमते नजर आए। परिसर में ठेठरी, खुरमी और बड़ा समेत पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए।
पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
हरेली के प्रकृति संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में पारिजात के पौधे लगाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि किसान की खुशहाली से ही गांव और प्रदेश की समृद्धि संभव है। वहीं कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने हरेली को खेती-किसानी, हरियाली और प्रकृति के प्रति आस्था का पर्व बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक अस्मिता, संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जड़ों से जुड़ा पर्व है। आधुनिक विकास के साथ अपनी लोक परंपराओं, ग्रामीण खेलों, लोककला और पारंपरिक खानपान को सहेजना सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, किसान और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और विशेषकर किसान परिवारों को हरेली तिहार की बधाई दी।


