नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। Justice Kurian Joseph: भारत के चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस कुरियन जोसेफ ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में संशोधन की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि चुनाव कराने वाली संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
नियुक्ति से लेकर पद से हटाने तक नियम बदलने की मांग
केरल में इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स के एक सेमिनार में जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तथा उनकी सेवा शर्तों को संविधान में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने इन मामलों को केवल संसदीय कानून पर छोड़ने के बजाय मजबूत संवैधानिक सुरक्षा उपाय अपनाने की जरूरत बताई।
सभी चुनाव आयुक्तों को मिले समान सुरक्षा
जस्टिस जोसेफ ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को पद से हटाने की अलग-अलग प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सभी चुनाव आयुक्तों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के समान सुरक्षा मिलनी चाहिए और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया भी एक जैसी होनी चाहिए।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को चुनाव कराने और मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत संवैधानिक प्रावधान जरूरी हैं।
संविधान सभा की बहसों का भी किया जिक्र
जस्टिस कुरियन जोसेफ ने संविधान सभा की बहसों का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग की नियुक्तियों पर सत्ताधारी दल के प्रभाव को लेकर जताई गई चिंताओं को याद किया। उन्होंने जोर दिया कि संवैधानिक शक्तियां किसी व्यक्ति का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि संस्थागत जिम्मेदारी हैं।
चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और आयुक्तों को मिलने वाली सुरक्षा में बदलाव की इस मांग से आयोग की स्वतंत्रता और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।


