जगदलपुर, 24 अक्टूबर। President Droupadi Murmu Bastar Visit: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि को नमन करते हुए बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और अनूठी परंपराओं की सराहना की। उन्होंने बस्तर दशहरा को छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामाजिक समरसता और सामूहिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा देश के अन्य उत्सवों से अलग पहचान रखता है। इसमें विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी रहती है। रथ निर्माण, रथ खींचने, पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में प्रत्येक समुदाय अपनी परंपरागत जिम्मेदारी निभाता है। यह आयोजन आपसी सहयोग, सामाजिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का उत्कृष्ट उदाहरण है।


मुरिया दरबार लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने वाली परंपरा
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मुरिया दरबार को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं और सामाजिक विषयों पर चर्चा करते हैं। सामूहिक संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की यह परंपरा भारतीय लोकतंत्र के मूल्यों को मजबूत करती है।
उन्होंने बस्तर पंडुम का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
बस्तर के युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना सकते हैं पहचान
राष्ट्रपति ने बस्तर ओलंपिक में जनजातीय युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि उचित मंच और सुविधाएं मिलने पर बस्तर के युवा खेलों सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं और ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या से मुक्ति की दिशा में हो रहे प्रयासों तथा सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना की। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि बस्तर के युवा अपनी प्रतिभा और परिश्रम से देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
जनजातीय संस्कृति और प्रकृति संरक्षण पर दिया जोर
राष्ट्रपति ने बस्तर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस क्षेत्र का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास और माता शबरी से जुड़े प्रसंग इस क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है और इसका संरक्षण सभी का दायित्व है।
प्रकृति संरक्षण पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि पेड़-पौधों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान जनजातीय जीवन दर्शन की विशेष पहचान है। उन्होंने अधिक से अधिक पौधरोपण करने, वनों की रक्षा करने और प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोड़ने के प्रयास समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। सभी वर्गों को समान अवसर देकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनजातीय समाज की भागीदारी और मजबूत की जा सकती है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने भी बस्तर की परंपराओं को सराहा
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बस्तर दशहरा और विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामूहिकता जनजातीय समाज की जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा समाज को साथ लेकर चलने और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने का संदेश देता है। राजशाही समाप्त होने के बाद भी यह परंपरा निरंतर जारी है और लोकतांत्रिक संवाद के सशक्त मंच के रूप में विकसित हुई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि बस्तर से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। इसी वर्ष फरवरी में उन्होंने बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया था और बाद में इसके विजेताओं को राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर सम्मानित किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा जनजातीय संस्कृति, समतामूलक विचारों और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों को गति दे रहे हैं।
सड़क, रेल, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार बस्तर के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। नियद नेल्लानार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। रायपुर से रावघाट तक रेल सेवा शुरू की गई है, जबकि रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर काम जारी है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे की व्यवस्था, वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज संग्राहकों को उचित मूल्य दिलाने और स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है। जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू किया गया है और गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हुआ है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम जारी है।
मांझियों और चालकी का मानदेय बढ़ाया गया
संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी अवधि, विशिष्ट धार्मिक परंपराओं और व्यापक जनभागीदारी के कारण अलग पहचान रखता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने परंपरागत प्रतिनिधियों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये और चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया है।
राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा के पारंपरिक अनुष्ठानों का उल्लेख करते हुए कुटुम्ब जात्रा और 27 अक्टूबर को माँ दंतेश्वरी एवं देवी मावली की डोली विदाई को उत्सव की विशिष्ट परंपराओं का परिचायक बताया। उन्होंने माँ दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद, विधायक, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पारंपरिक मांझी-चालकी, बस्तर दशहरा समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।


