रायपुर, 15 अक्टूबर। Technical Assistants Protest: छत्तीसगढ़ में तकनीकी सहायक संघ ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। दो दिवसीय जिला स्तरीय हड़ताल के बाद संघ अब रायपुर में राज्य स्तरीय आंदोलन करने जा रहा है। तकनीकी सहायकों ने नियमितीकरण सहित तीन प्रमुख मांगों को लेकर काम बंद कर दिया है। उनका आरोप है कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले किए गए वादों को अब तक पूरा नहीं किया है।
नियमितीकरण का वादा पूरा नहीं होने से नाराजगी
तकनीकी सहायक संघ का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के संचालन में उनकी अहम भूमिका है। उनका काम नियमित कर्मचारियों के समान है और कई जगह उन्हें उनसे अधिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
संघ के मुताबिक, भाजपा ने चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र में सरकार बनने के 15 दिनों के भीतर तकनीकी सहायकों को नियमित करने का वादा किया था। लेकिन सरकार के तीन साल से अधिक समय बीतने के बाद भी यह मांग पूरी नहीं हुई है। इसी नाराजगी के चलते कर्मचारियों ने हड़ताल का रास्ता अपनाया है।
ये हैं तकनीकी सहायकों की तीन प्रमुख मांगें
जिला प्रवक्ता मनीष देवांगन ने बताया कि संघ की तीन प्रमुख मांगें हैं। इनमें नियमितीकरण सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक तकनीकी सहायकों को पंचायत सचिवों की तरह पंचायत नियमावली में शामिल किया जाए।
इसके साथ ही संघ ने सेवा सुरक्षा नीति लागू करने की मांग की है, ताकि तकनीकी सहायकों की नौकरी सुरक्षित रह सके और उन्हें मनमाने तरीके से सेवा से न हटाया जाए।
महीनों तक वेतन नहीं मिलने से परेशानी
तकनीकी सहायक ममता भू आर्य ने बताया कि कर्मचारियों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, कई बार महीनों तक वेतन नहीं मिलने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। वहीं, कुछ कर्मचारियों को नौकरी के लिए घर से करीब 30 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानियां बढ़ जाती हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि तकनीकी सहायकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उनके वादे पूरे किए जाएं।
सरकार से मांगें पूरी करने की अपील
तकनीकी सहायक संघ का कहना है कि ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में योगदान देने वाले कर्मचारियों की मांगों पर सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए। संघ को उम्मीद है कि राज्य स्तरीय आंदोलन के बाद सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान देगी।


