WomenEmpowerment: तालाब बना महिलाओं की कमाई का जरिया… मछली पालन से लाखों की आय

WomenEmpowerment: तालाब बना महिलाओं की कमाई का जरिया… मछली पालन से लाखों की आय

जशपुर, 31 अगस्त। WomenEmpowerment: जिले की ग्रामीण महिलाएं अब मछली पालन के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। शासकीय योजनाओं, तालाबों के पट्टे और विभागीय तकनीकी सहयोग से मनोरा और दुलदुला विकासखंड की महिला स्व-सहायता समूहों ने मछली पालन को अपनी आजीविका का मजबूत साधन बना लिया है। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।

भभरी में मछली पालन से करीब 6 लाख रुपये की आय

मनोरा विकासखंड के ग्राम भभरी में कमल महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पिछले तीन वर्षों से 0.700 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में 10 वर्षीय पट्टे के तहत मछली पालन कर रही हैं।

विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन और समूह की महिलाओं के सामूहिक प्रयास से तालाब में हर साल करीब 3 क्विंटल मछली का उत्पादन हो रहा है। इससे समूह को लगभग 6 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है।

मछली पालन से होने वाली आय का उपयोग महिलाएं घरेलू खर्च के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रही हैं।

सिमड़ा की महिलाओं ने भी बढ़ाई आमदनी

दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में दीप महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी पिछले तीन वर्षों से 0.800 हेक्टेयर के शासकीय तालाब में मछली पालन कर रही हैं।

समूह द्वारा हर साल करीब 3.30 क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे लगभग 6.93 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। मछली पालन ने समूह की महिलाओं को नियमित आय का जरिया उपलब्ध कराया है।

अब महिलाएं न केवल अपनी आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रही हैं, बल्कि परिवार के आर्थिक फैसलों में भी पहले की तुलना में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

सरकारी योजनाओं से आत्मनिर्भरता को मिला बढ़ावा

शासकीय तालाबों का पट्टा, तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग ग्रामीण महिलाओं के लिए मछली पालन को लाभकारी व्यवसाय बनाने में मदद कर रहा है। इससे महिलाओं को रोजगार के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर रहने के बजाय गांव में ही आय का स्थायी साधन मिल रहा है।

कमल और दीप महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता यह दर्शाती है कि सामूहिक प्रयास, सरकारी योजनाओं और उचित मार्गदर्शन के जरिए ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति दे सकती हैं।

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