जगदलपुर, 19 अक्टूबर। Bastar Dussehra Tradition: छत्तीसगढ़ की विश्वप्रसिद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा बस्तर दशहरा का मुख्य चरण शुरू हो गया है। अष्टमी के अवसर पर मां दंतेश्वरी की पावन डोली और छत्र को विधि-विधान के साथ दंतेवाड़ा स्थित मुख्य मंदिर से जगदलपुर के लिए रवाना किया गया। 618 साल पुरानी इस परंपरा के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे।
जयकारों से गूंजा दंतेवाड़ा
मां दंतेश्वरी की डोली की रवानगी के दौरान जिया परिवार के सदस्यों और पुजारियों ने पूरे विधि-विधान के साथ डोली को अपने कंधों पर उठाया। इस दौरान दंतेवाड़ा के डंकिनी पुल और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्त माता के जयकारे लगाते हुए उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल देखने को मिला।
618 साल पुरानी परंपरा का विशेष महत्व
बस्तर दशहरा अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। मां दंतेश्वरी की डोली और छत्र का दंतेवाड़ा से जगदलपुर तक पहुंचना इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
जगदलपुर पहुंचने पर मां दंतेश्वरी की डोली का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया जाएगा। इसके बाद बस्तर दशहरा के विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और रथ परिक्रमा से जुड़े कार्यक्रमों में तेजी आएगी।
श्रद्धालुओं में उत्साह और उल्लास
बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होने पहुंच रहे हैं। सदियों पुरानी परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े इस पर्व को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। बस्तर दशहरा एक बार फिर अपनी विशिष्ट पहचान और समृद्ध परंपरा के जरिए लोगों को जोड़ रहा है।


