Chhattisgarh: दीयों की रोशनी से संवर रही जिंदगी… आत्मनिर्भर बन रहीं गांव की महिलाएं

Chhattisgarh: दीयों की रोशनी से संवर रही जिंदगी… आत्मनिर्भर बन रहीं गांव की महिलाएं

कांकेर, 07 नवम्बर। Chhattisgarh: दीपावली पर हर घर को रोशन करने की तैयारी के बीच छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के चारामा विकासखंड के ग्राम भिलाई की महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। यहां सरगम उत्पादक समूह की महिलाएं गोबर से प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल दीये तैयार कर रही हैं। इन दीयों की मांग लगातार बढ़ रही है और अब तक समूह की महिलाएं 11 हजार 400 से अधिक दीये बेच चुकी हैं।

10 महिलाओं से शुरू हुआ समूह, आज 36 सदस्य

ग्राम भिलाई का सरगम उत्पादक समूह बिहान योजना से जुड़कर स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का काम कर रहा है। वर्ष 2016 में महज 10 महिलाओं से शुरू हुआ यह समूह आज 36 महिलाओं को आजीविका से जोड़ चुका है। समूह की महिलाएं गोबर से दीये बनाने के साथ कई अन्य उत्पादों का निर्माण भी कर रही हैं।

गोबर से तैयार हो रहे आकर्षक दीये

समूह की महिलाएं गोबर एकत्रित कर उसे आवश्यक सामग्री के साथ तैयार करती हैं। इसके बाद मिश्रण को सांचों में डालकर अलग-अलग आकार के दीये बनाए जाते हैं। इन्हें सुखाने के बाद बिक्री के लिए बाजार में भेजा जाता है।

समूह की सदस्य सुभद्रा नागराज के मुताबिक, वर्ष 2022 में उन्हें गोबर के दीये बनाने की प्रेरणा मिली थी। पहले साल महिलाओं ने करीब 10 हजार दीये तैयार किए, जिनसे लगभग 20 हजार रुपये का लाभ हुआ। इसके बाद महिलाओं ने इस काम को आगे बढ़ाया और इसे आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बना लिया।

इस साल 11,400 से ज्यादा दीयों की बिक्री

समूह की सदस्य ममता नागराज ने बताया कि इस वर्ष दीपावली के अवसर पर अब तक 11 हजार 400 गोबर के दीये बेचे जा चुके हैं। लगातार नए ऑर्डर मिलने के कारण महिलाएं उत्पादन बढ़ाने में जुटी हैं। वर्तमान में समूह की महिलाएं प्रतिदिन करीब 500 दीये तैयार कर रही हैं।

इन दीयों की बिक्री सी-मार्ट, स्थानीय हाट-बाजारों और अन्य माध्यमों से की जा रही है। समूह को रायपुर से भी ऑर्डर मिले हैं, जिससे महिलाओं का उत्साह बढ़ा है।

अचार, मशरूम और राखी से भी कमा रहीं मुनाफा

सरगम उत्पादक समूह की महिलाएं केवल दीये ही नहीं बनातीं, बल्कि आम का अमचूर पाउडर, इमली का संग्रहण एवं प्रसंस्करण, आम का अचार, राखियां और मशरूम का उत्पादन भी करती हैं।

मशरूम उत्पादन में भी महिलाओं को अच्छी सफलता मिली है। समूह ने करीब 4 हजार रुपये की लागत से मशरूम तैयार कर 7 हजार रुपये में बेचा, जिससे लगभग 3 हजार रुपये का लाभ हुआ। अब समूह की अन्य महिलाएं भी इस गतिविधि से जुड़ने की तैयारी कर रही हैं।

बिहान से मिला आर्थिक सहयोग

महिलाओं को अपने काम का विस्तार करने के लिए बिहान योजना के माध्यम से बैंक से 2 लाख रुपये का ऋण मिला है। इसके अलावा 50 हजार रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ। शेष 1 लाख 50 हजार रुपये का भुगतान समूह द्वारा किश्तों में किया जा रहा है। इस आर्थिक सहयोग से महिलाओं को नए रोजगार के अवसर विकसित करने में मदद मिली है।

वोकल फॉर लोकल को दे रहीं बढ़ावा

ग्राम भिलाई की ये महिलाएं स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचा रही हैं। उनके प्रयासों से एक ओर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आमदनी मिल रही है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के वोकल फॉर लोकल और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के संकल्प की दिशा में सरगम उत्पादक समूह की महिलाएं एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी हैं। इन महिलाओं के बनाए दीये इस दीपावली में घरों को रोशन करने के साथ उनकी आत्मनिर्भरता की कहानी भी बयां कर रहे हैं।

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