रायपुर, 06 अगस्त। Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ सरकार ने घुमंतू और बेसहारा पशुओं के संरक्षण, गौ-संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से ‘गौधाम योजना’ की शुरुआत की है। योजना के तहत प्रदेशभर में 1,460 गौधाम स्थापित किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग ने योजना के क्रियान्वयन को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है।
योजना के अनुसार प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में 10-10 उत्कृष्ट गौठानों का चयन कर उन्हें सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त गौधाम के रूप में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप स्थित गौठानों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों के कारण होने वाले हादसों और यातायात बाधाओं को कम किया जा सके।
अब तक योजना के तहत 408 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 151 गौधामों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं 88 गौधामों का पंजीयन पूरा हो चुका है। वर्तमान में संचालित 42 गौधामों में 5 हजार से अधिक निराश्रित पशुओं की देखभाल और पालन-पोषण किया जा रहा है।
गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO), पंजीकृत गौशालाओं, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), ट्रस्ट और ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जाएगा। हाल ही में पशुधन विकास विभाग ने नियमों में संशोधन कर ग्राम पंचायतों और शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल किया है।
योजना के तहत चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद ही अंतिम स्वीकृति दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल गौ-संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जैविक खेती, गोबर आधारित उत्पादों और कृषि आधारित ग्रामीण उद्योगों को भी नई गति मिलेगी।


