नई दिल्ली, 20 जुलाई| Health News: भारत में पहली बार डेंगू की वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने जापानी कंपनी टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स की डेंगू वैक्सीन QDENGA (TAK-003) को देश में बाजार में इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों को लगाई जा सकेगी और इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी कि व्यक्ति पहले कभी डेंगू से संक्रमित हुआ है या नहीं।
दो डोज में मिलेगी सुरक्षा
कंपनी के अनुसार, QDENGA की दो डोज दी जाएंगी। प्रत्येक डोज 0.5 मिलीलीटर की होगी, जिसे त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) इंजेक्शन के रूप में लगाया जाएगा। पहली और दूसरी डोज के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाएगा।
28 हजार से अधिक लोगों पर हुए क्लीनिकल ट्रायल
भारत में वैक्सीन को मंजूरी ताकेडा के वैश्विक क्लीनिकल डेवलपमेंट प्रोग्राम के आधार पर दी गई है। इसके तहत फेज-1, फेज-2 और फेज-3 के कुल 19 क्लीनिकल ट्रायल किए गए, जिनमें 28 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। कंपनी का दावा है कि वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों प्रमुख सीरोटाइप से सुरक्षा प्रदान करने के लिए विकसित की गई है।
भारत में ही होगा उत्पादन
‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत QDENGA का बड़े पैमाने पर उत्पादन भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए टाकेडा ने हैदराबाद स्थित फार्मा कंपनी बायोलॉजिकल ई के साथ साझेदारी की है। देश में उत्पादन होने से वैक्सीन की उपलब्धता बेहतर रहने और कीमत अपेक्षाकृत किफायती होने की उम्मीद जताई जा रही है।
शुरुआती छह महीने रहेगी निगरानी
कंपनी के अनुसार, बाजार में लॉन्च होने के बाद शुरुआती छह महीनों तक वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। हालांकि इसकी कीमत का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं किया गया है।
WHO की भी सिफारिश
QDENGA को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्री-क्वालिफिकेशन भी मिल चुकी है। WHO डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में इस वैक्सीन के उपयोग की सिफारिश करता है। संगठन का मानना है कि अधिक संक्रमण वाले क्षेत्रों में इसे बिना प्री-वैक्सीनेशन स्क्रीनिंग के सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।
भारत पर डेंगू का बड़ा बोझ
ताकेडा के मुताबिक, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का सबसे अधिक बोझ है। देश के कई हिस्सों में डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन के साथ-साथ मच्छर नियंत्रण, जनजागरूकता और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को भी जारी रखना जरूरी होगा।
डेंगू के मामले दुनिया के 125 से अधिक देशों में सामने आते हैं और वैश्विक स्तर पर दर्ज मामलों का लगभग एक-तिहाई बोझ भारत पर है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और मच्छरों के बढ़ते प्रजनन के कारण संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।


