रायपुर, 07 नवम्बर। Ktujm Deputation Controversy: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर की प्रतिनियुक्ति को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। डॉ. अभिषेक दुबे की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें मूल विभाग में वापस बुलाने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से बार-बार पत्र जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद कार्यभार वापसी का मामला अब तक चर्चा में बना हुआ है।
दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. अभिषेक दुबे सहायक प्राध्यापक (प्रबंधन) के पद पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, निमोरा में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 मार्च 2026 को पत्र जारी कर उनकी प्रतिनियुक्ति तत्काल समाप्त करने और मूल विभाग में कार्यभार संभालने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद 28 मई 2026 को विश्वविद्यालय की ओर से दोबारा पत्र जारी किया गया। इसमें निर्धारित समय-सीमा के भीतर मूल पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए। पत्र में राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशों के साथ विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के निर्णय का भी उल्लेख किया गया था।
आदेश का पालन नहीं होने पर सेवा समाप्ति की चेतावनी
विश्वविद्यालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया था कि प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद भी यदि निर्धारित समय में कार्यभार ग्रहण नहीं किया जाता है, तो विश्वविद्यालय में उनकी सेवा स्वतः समाप्त मानी जाएगी। साथ ही सहायक प्राध्यापक (प्रबंधन) के पद को रिक्त मानते हुए सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही गई थी।
विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विश्वविद्यालय की ओर से कई बार प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के निर्देश जारी किए गए, तो उनका पालन किस स्तर पर अटका रहा? दस्तावेजों में राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशों के अनुपालन को लेकर नाराजगी का भी उल्लेख सामने आया है।


