उज्जैन, 18 सितम्बर। Mohan Bhagwat: उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं के सामने धर्म को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अक्सर धर्म को रिलीजन के अर्थ में समझ लिया जाता है, जबकि दोनों की अवधारणाएं अलग हैं।
भागवत ने कहा कि ‘रिलीजन’ शब्द ‘रिलीगो’ से आया है, जिसका अर्थ बांधना या अनुशासन में रखना बताया जाता है। वहीं, उन्होंने धर्म को व्यक्ति को बांधने के बजाय मुक्त करने वाली अवधारणा के रूप में समझाया। उन्होंने युवाओं से धर्म और रिलीजन को लेकर मन में बनी इस गलतफहमी को दूर करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि धर्म केवल बुढ़ापे में पढ़ने या समझने की चीज नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के अस्तित्व के प्रारंभ से अंत तक जुड़ा रहता है। भागवत ने युवाओं से केवल भाषण सुनने के बजाय संवाद के माध्यम से विषय को समझने की बात कही।
उन्होंने धर्म को जीवन के सुख और सही दिशा से जोड़ते हुए युवाओं को इसके व्यापक अर्थ को समझने पर जोर दिया।
तीन दिवसीय कार्यक्रम में जुटे युवा
उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद तीन दिवसीय कार्यक्रम है। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से युवा शामिल हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान धर्म, संस्कृति और युवाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की जा रही है।


