रायपुर, 15 अक्टूबर। Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन 15 अक्टूबर को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता ममता, वात्सल्य और करुणा की प्रतीक हैं। उनकी आराधना से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा कर मां को फल, मिठाई और केले का भोग अर्पित करते हैं।
मां स्कंदमाता का स्वरूप शक्ति और मातृत्व का संदेश देता है। नवरात्र के इस विशेष दिन पर भक्त व्रत रखते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और मां की आरती कर परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, प्रिय भोग, शुभ रंग और मंत्र।
मां स्कंदमाता की पूजा के शुभ मुहूर्त
पंचांग आधारित जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर को पूजा के लिए ये शुभ समय बताए गए हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
- अमृत काल: रात 8:58 बजे से 10:45 बजे तक
स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार शुभ समय में अंतर हो सकता है।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
नवरात्र के पांचवें दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद मां स्कंदमाता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर दीपक जलाएं। मां को रोली, अक्षत, पीले फूल और फल अर्पित करें। इसके बाद केले, मिठाई या अन्य सात्विक प्रसाद का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धालु चाहें तो दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं। अंत में व्रत कथा सुनें या पढ़ें, मां की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। इसके बाद प्रसाद सभी में वितरित करें।
क्यों कहलाती हैं मां स्कंदमाता?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है। उन्हें देवताओं की सेना का सेनापति माना जाता है। भगवान स्कंद की माता होने के कारण देवी दुर्गा के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है।
मां स्कंदमाता को ममता, वात्सल्य और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु उनकी पूजा करके मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और संतान सुख की कामना करते हैं।
मां स्कंदमाता को क्या चढ़ाएं भोग?
नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा केले से बनी खीर, हलवा, मिठाई और अन्य मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। प्रसाद तैयार करते समय स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां को श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
पूजा में कौन-सा रंग पहनना शुभ?
मां स्कंदमाता की पूजा में पीले रंग को शुभ माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने और मां को पीले फूल अर्पित करने की परंपरा है। पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा, प्रसन्नता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, पूजा के लिए किसी विशेष रंग के वस्त्र पहनना अनिवार्य नहीं है। भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
ऐसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। उनके दो हाथों में कमल के फूल सुशोभित हैं, जबकि एक हाथ वरद या अभय मुद्रा में रहता है। उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं और उनका वाहन सिंह है।
कमल पर विराजमान होने के कारण मां स्कंदमाता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनका स्वरूप शक्ति, करुणा और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के पांचवें दिन भक्त मां की पूजा-अर्चना कर जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बनाए रखने की कामना करते हैं।


