Chhattisgarh Foundation Day: छत्तीसगढ़ का 26वां स्थापना दिवस आज

Chhattisgarh Foundation Day: छत्तीसगढ़ का 26वां स्थापना दिवस आज

रायपुर, 01 नवम्बर। Chhattisgarh Foundation Day: छत्तीसगढ़ आज 1 नवंबर को अपना 26वां स्थापना दिवस मना रहा है। साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आए इस राज्य का इतिहास गौरव, संघर्ष और सामाजिक जागरण की कहानियों से भरा हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़ का नाम कैसे पड़ा और अलग राज्य बनने के लिए कितने लंबे समय तक आंदोलन चला?

इतिहासकार डॉ. रमेंद्र नाथ मिश्र के अनुसार, प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ का क्षेत्र दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था। यहां मौर्य, पांडुवंशी, सोमवंशी और कलचुरी शासकों का शासन रहा। अलग-अलग राजवंशों के शासनकाल ने इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध किया।

36 गढ़ों से पड़ा छत्तीसगढ़ नाम

इतिहासकार के मुताबिक, कलचुरी शासनकाल में रतनपुर और रायपुर की दो शाखाओं के अंतर्गत 18-18 गढ़ होने की मान्यता है। इस तरह कुल 36 गढ़ों के आधार पर इस क्षेत्र का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा माना जाता है। साहित्य में छत्तीसगढ़ नाम के प्रयोग का उल्लेख वर्ष 1487 से मिलता है।

संघर्ष और बलिदान से बनी प्रदेश की पहचान

छत्तीसगढ़ का इतिहास केवल राजवंशों तक सीमित नहीं है। गुरु घासीदास का सामाजिक जागरण, वीर नारायण सिंह का बलिदान और बस्तर के आदिवासी विद्रोह प्रदेश के इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय हैं। वर्ष 1910 का भूमकाल विद्रोह भी अन्याय के खिलाफ आदिवासी समाज के संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।

36 वर्षों के आंदोलन के बाद मिला अलग राज्य का दर्जा

अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन चला। डॉ. रमेंद्र नाथ मिश्र बताते हैं कि वे स्वयं 36 वर्षों तक इस आंदोलन से जुड़े रहे। आखिरकार 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ देश का 26वां राज्य बना।

स्थापना दिवस पर इतिहासकार ने जताई चिंता

स्थापना दिवस के अवसर पर इतिहासकार डॉ. मिश्र ने प्रदेश के बौद्धिक विकास और शिक्षण संस्थानों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने शोध संस्थानों को सक्रिय करने की आवश्यकता बताई। साथ ही स्वतंत्रता सेनानी वीर नारायण सिंह के बलिदान दिवस पर शासकीय अवकाश घोषित करने की मांग भी की।

26 साल में कितनी सहेजी गई ऐतिहासिक विरासत?

छत्तीसगढ़ ने अलग राज्य बनने के बाद विकास के कई पड़ाव तय किए हैं, लेकिन अपनी ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति और संघर्ष की गाथाओं को संरक्षित रखना आज भी बड़ी जिम्मेदारी है। स्थापना दिवस पर यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि 26 वर्षों के सफर में प्रदेश ने अपनी गौरवशाली विरासत को कितना सहेजा है और आने वाली पीढ़ियों तक इसे पहुंचाने के लिए कितने प्रयास किए जा रहे हैं?

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