रायपुर, 3 अगस्त। Chhattisgarh News: राजधानी रायपुर में आयोजित ‘स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस’ राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने नए आपराधिक कानूनों और डिजिटल न्याय व्यवस्था पर अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 150 साल पुराने औपनिवेशिक कानूनों की जगह लागू किए गए नए भारतीय कानूनों का उद्देश्य आम नागरिक को सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय के साथ न्याय प्रणाली को भी तकनीक के अनुरूप मजबूत बनाया जा रहा है। नए कानूनों के तहत अब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक फॉरेंसिक रिपोर्ट को कानूनी मान्यता मिल चुकी है, जिससे जांच और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनी है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी पुलिस थाने अब ऑनलाइन प्रणाली से जुड़े हैं। राज्य में अब तक 1.97 लाख से अधिक ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे आम लोगों को घर बैठे शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मिल रही है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि ई-साक्ष्य, ई-समन और ‘न्याय श्रुति’ (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं ने न्याय प्रणाली को नई गति दी है। उन्होंने बताया कि जून माह में जिला अदालतों में 9,910 मामलों और हाईकोर्ट में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई।
उन्होंने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के माध्यम से पुलिस, न्यायालय, जेल और अभियोजन विभाग डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे कागजी प्रक्रिया कम हुई है और मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिल रही है।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ‘वन डेटा, वन एंट्री’ की अवधारणा पर काम कर रही है। मैनुअल एफआईआर की व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। डिजिटल फॉरेंसिक, नेफिस (NAFIS) और ई-साक्ष्य जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामलों की लंबित संख्या कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम में विधि मंत्री गजेंद्र यादव, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस अधिकारी और विधि विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला में डिजिटल तकनीक के माध्यम से न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आमजन के लिए सुलभ बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।


