नई दिल्ली, 10 अगस्त। भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाने और रुपये को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। सरकार अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ मिलकर विदेशी निवेशकों और अनिवासी भारतीयों (NRI) से पूंजी जुटाने के नए विकल्प तलाश रही है।
सरकार ने सरकारी बैंकों से ऐसे सुझाव मांगे हैं, जिनसे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाया जा सके और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिले। इसके लिए विदेशी मुद्रा जमा, NRI निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
17-18 अगस्त को होगी बैठक
वित्त मंत्रालय ने 17 और 18 अगस्त को नई दिल्ली में सरकारी बैंकों के साथ दो दिवसीय बैठक बुलाई है। इसमें विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उपायों के अलावा बैंक जमा बढ़ाने, भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करने और छोटे एवं मध्यम कारोबारों को कर्ज उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
बैठक में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुख शामिल होंगे। सरकार का फोकस विदेशी निवेश के साथ-साथ घरेलू स्तर पर जमा राशि बढ़ाने की क्षमता मजबूत करने पर भी है।
RBI की योजना से आया 40 अरब डॉलर
विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए RBI ने जून में सरकारी बैंकों के जरिए जुटाई गई विदेशी मुद्रा जमा और बाहरी वाणिज्यिक उधारी से जुड़ी डॉलर-स्वैप सुविधा की घोषणा की थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 30 जुलाई तक इस कार्यक्रम के तहत करीब 40 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत में आई। इसमें FCNR जमा की हिस्सेदारी करीब 36 अरब डॉलर रही।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि FCNR जमा से रुपये को तत्काल सहारा मिल सकता है, लेकिन लंबे समय में FDI जैसे स्थायी निवेश बढ़ाना जरूरी है। वित्त वर्ष 2026 में रुपये की कीमत में करीब 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।
सरकार को उम्मीद है कि विदेशी पूंजी बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार अब ऐसे निवेश पर जोर दे रही है, जो लंबे समय तक भारतीय अर्थव्यवस्था में बना रहे और विकास को स्थायी आधार दे।


