भिवंडी, 31 जुलाई। Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में देर रात बड़ा हादसा हो गया। भिवंडी महानगरपालिका क्षेत्र के बालाजी नगर-गंगारामवाड़ी स्थित कोहिनूर अपार्टमेंट नाम की ग्राउंड प्लस चार मंजिला जर्जर इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका के बीच राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और महानगरपालिका की आपदा प्रबंधन टीम मौके पर पहुंच गई। हालांकि, संकरी गली होने के कारण शुरुआती राहत कार्य में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बाद में एनडीआरएफ और टीडीआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। रास्ते में बनी एक पुरानी चॉल को जेसीबी की मदद से हटाने के बाद बचाव दल मलबे तक पहुंच सका और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
जानकारी के अनुसार, कोहिनूर अपार्टमेंट का निर्माण वर्ष 2012 में हुआ था। इमारत में दो विंग थे और निर्माण की गुणवत्ता कमजोर होने के कारण इसे पहले ही जर्जर और खतरनाक घोषित किया जा चुका था। महानगरपालिका ने इमारत पर नोटिस भी चस्पा किया था। ग्राउंड फ्लोर के पिलरों के कमजोर होने के कारण उनकी मरम्मत का कार्य चल रहा था।
शाम करीब 6 बजे से इमारत में दरारें पड़ने लगी थीं। रात करीब 8 बजे इमारत के झुकने की सूचना मिलने पर प्रभाग समिति क्रमांक-4 के सहायक आयुक्त अरविंद घोगरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और इमारत को खाली कराया जा रहा था। कुछ लोग अपना सामान निकालने के लिए अंदर मौजूद थे, जबकि मरम्मत का काम भी जारी था। इसी दौरान अचानक पूरी इमारत ढह गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय अधिकांश लोगों को बाहर निकाल लिया गया था, जिससे और बड़ा नुकसान टल गया। इसके बावजूद 5 से 6 लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य में एनडीआरएफ, टीडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें संयुक्त रूप से जुटी हुई हैं।
हादसे में एक परिवार बाल-बाल बच गया। इमारत में रहने वाले अरविंद गुप्ता और उनकी पत्नी किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन उनकी बेटी कोमल मलबे में फंस गई। कोमल ने हिम्मत दिखाते हुए खुद ही मलबे से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। उसने बताया कि इमारत के पिलरों की मरम्मत का काम चल रहा था, तभी अचानक पूरी इमारत ढह गई।
स्थानीय युवकों ने भी हादसे के तुरंत बाद राहत कार्य शुरू कर कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने मलबे में फंसे दो लोगों को बाहर निकालने में सफलता हासिल की। प्रशासन का कहना है कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता है। प्रभावित परिवारों के लिए नजदीकी स्कूलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी रहने की व्यवस्था की गई है।
महापौर नारायण चौधरी ने नागरिकों से अपील की है कि खतरनाक घोषित इमारतों में रहने का जोखिम न उठाएं। वहीं, प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और बचाव अभियान जारी है।


