रायपुर, 14 जुलाई। Chhattisgarh Assembly Monsoon Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में रायपुर के पेयजल संकट का मुद्दा गरमाया। खास बात यह रही कि सत्ता पक्ष के ही विधायकों ने अमृत मिशन और जल जीवन मिशन के कामकाज को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, भैयालाल राजवाड़े, सुनील सोनी और राजेश मूणत ने रायपुर की जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर में हर साल गर्मी के दौरान जल संकट की स्थिति बनती है। कई इलाकों में पानी की टंकियां होने के बावजूद टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाना पड़ता है।
विधायक अजय चंद्राकर ने अमृत मिशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि योजना किन वार्डों के लिए बनाई गई थी और इसकी कुल लागत कितनी थी। उन्होंने कहा कि रायपुर के करीब 1.21 लाख घरों तक अब तक पानी नहीं पहुंच पाया है, जिससे योजना की तैयारी और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होते हैं।
जवाब में नगरीय प्रशासन मंत्री और उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि रायपुर में अमृत मिशन की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। योजना के तहत पांच पैकेज स्वीकृत किए गए थे, जिनमें कई काम पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ कार्य अभी जारी हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 304 करोड़ रुपये के कार्य प्रक्रियाधीन हैं।
अरुण साव ने कहा कि बढ़ती आबादी और गिरते भूजल स्तर के बावजूद सरकार हर घर तक नल कनेक्शन पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने स्मार्ट सिटी और 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर भी जानकारी दी और बताया कि जलापूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 45.33 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
वहीं भाजपा विधायक भैयालाल राजवाड़े ने बैकुंठपुर क्षेत्र में जल जीवन मिशन की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजना का लाभ लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है और ग्रामीण अब भी पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं।


