रायपुर, 24 अगस्त। GPM News: छत्तीसगढ़ का 25वां नवगठित जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ अब खास चावल विष्णुभोग के लिए भी पहचान बना रहा है। भारत सरकार की एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत विष्णुभोग चावल को जिले के प्रमुख उत्पाद के रूप में चुना गया है। अपनी खास खुशबू और स्वाद के कारण इसकी मांग अब स्थानीय बाजार से निकलकर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच रही है।
1500 किसान 600 एकड़ में कर रहे खेती
पेंड्रा क्षेत्र में करीब 1,500 किसान 600 एकड़ जमीन में विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। पारंपरिक खेती से जुड़े इस धान को बढ़ावा मिलने से किसानों को बेहतर आय की उम्मीद है। साथ ही इससे जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
महिलाओं को मिला रोजगार
विष्णुभोग चावल के उत्पादन और बिक्री में महिला समूह भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी किसानों से धान खरीदती है। इसके बाद मिनी राइस मिल में धान का प्रसंस्करण कर चावल तैयार किया जाता है। फिर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के बाद इसे बाजार में बेचा जाता है।
इस काम से समूह की 15 महिला सदस्यों को रोजगार मिला है। समूह की महिलाओं ने अब तक करीब 2 टन विष्णुभोग चावल बेचकर लगभग 1 लाख रुपये का लाभ कमाया है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ लखपति दीदी बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।
स्थानीय चावल से आत्मनिर्भरता की राह
विष्णुभोग की कहानी यह दिखाती है कि स्थानीय कृषि उत्पाद को सही बाजार, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग मिले तो वह बड़े बाजार में अपनी पहचान बना सकता है। खेती से लेकर चावल तैयार करने, पैकेजिंग और बिक्री तक स्थानीय स्तर पर काम बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं।
ODOP से राष्ट्रीय बाजार की उम्मीद
एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत विष्णुभोग को बेहतर बाजार, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का अवसर मिल रहा है। मांग बढ़ने के साथ किसानों और महिला समूहों के लिए नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं।
विष्णुभोग चावल अब सिर्फ एक पारंपरिक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि किसानों की आय, महिलाओं के रोजगार और GPM की कृषि पहचान का नया उदाहरण बनकर उभर रहा है। आने वाले समय में इसका बाजार और बढ़ने की उम्मीद है।


