Hartalika Teej: हरतालिका तीज में 16 श्रृंगार का खास महत्व… जानिए माता पार्वती से जुड़ी मान्यता

Hartalika Teej: हरतालिका तीज में 16 श्रृंगार का खास महत्व… जानिए माता पार्वती से जुड़ी मान्यता

रायपुर, 14 सितम्बर। Hartalika Teej: हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

तीज की पूजा में 16 श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं स्नान के बाद पारंपरिक रूप से 16 श्रृंगार करती हैं और माता पार्वती को भी श्रृंगार सामग्री अर्पित करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 16 श्रृंगार को सौभाग्य, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

माता पार्वती से जुड़ी है परंपरा

हरतालिका तीज की परंपरा माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह से जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी मान्यता के चलते महिलाएं तीज के दिन माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।

पूजा में सिंदूर, कुमकुम, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, पायल और बिछिया समेत कई श्रृंगार सामग्री शामिल की जाती है। मान्यता है कि माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

प्रेम और समर्पण का प्रतीक

16 श्रृंगार की परंपरा को पति-पत्नी के बीच प्रेम, सम्मान और समर्पण की भावना से भी जोड़ा जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती के वैवाहिक संबंध को आदर्श मानते हुए महिलाएं श्रद्धा के साथ पूजा करती हैं।

हालांकि, 16 श्रृंगार और इससे जुड़े लाभ धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके वैज्ञानिक प्रभावों की पुष्टि आवश्यक रूप से नहीं हुई है।

Religion