नई दिल्ली, 16 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “I am proud to be a dimagi naxal!” यानी, “मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।”
15 अगस्त को लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलवाद और माओवादी विचारधारा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि जंगलों में सक्रिय नक्सली हिंसा को काफी हद तक खत्म किया जा चुका है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ यानी माओवादी मानसिकता अभी भी मौजूद है। प्रधानमंत्री ने ऐसी मानसिकता रखने वालों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की अपील की।
चिदंबरम ने किया तीखा पलटवार
प्रधानमंत्री के बयान के अगले दिन पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। उनकी टिप्पणी को प्रधानमंत्री के बयान का सीधा राजनीतिक जवाब माना जा रहा है। चिदंबरम के बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज होने के संकेत हैं।
जयराम रमेश ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले राजनीतिक विरोधियों के लिए ‘शहरी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। रमेश ने दावा किया कि संसद में स्पष्ट किया जा चुका है कि ‘शहरी नक्सली’ की कोई आधिकारिक कानूनी परिभाषा नहीं है।
रमेश ने आरोप लगाया कि अब इसी तरह ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल सरकार के आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आलोचकों को बदनाम करने का आरोप भी लगाया।
माकपा ने भी जताई आपत्ति
माकपा महासचिव एमए बेबी ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी नक्सलवाद और माओवादी हिंसा का समर्थन नहीं करती, लेकिन सरकार की नीतियों या कथित तौर पर कानून और संविधान के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाना अलग विषय है।
बेबी ने आरोप लगाया कि ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों के जरिए विपक्ष और सरकार के आलोचकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विचारों के आधार पर उसे माओवादी मानसिकता वाला बताना गंभीर और आपत्तिजनक है।


