जगदलपुर, 25 जुलाई। Jagdalpur News: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां रेप के आरोप में जेल भेजे गए युवक से उसकी प्रेमिका ने केंद्रीय जेल परिसर में शादी रचाई। परिवार के विरोध, कानूनी प्रक्रिया और सामाजिक दबाव के बीच शुरू हुई यह प्रेम कहानी आखिरकार सात फेरों के साथ विवाह के बंधन में बंध गई। युवती का कहना है कि उसने परिवार के दबाव में शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि वह और युवक एक-दूसरे से प्रेम करते थे और शादी करना चाहते थे।
मामला परपा थाना क्षेत्र के राजूर गांव का है। यहां के रहने वाले सुरेश सेठिया और युवती लंबे समय से एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों बालिग थे और शादी करना चाहते थे, लेकिन अलग-अलग जाति से होने के कारण परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं था। परिजनों के विरोध के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दुष्कर्म का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
युवक के जेल जाने के बाद युवती ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उसने कोर्ट को बताया कि वह अपनी मर्जी से सुरेश से प्रेम करती है और उससे विवाह करना चाहती है। युवती ने यह भी कहा कि शिकायत परिवार के दबाव में दर्ज कराई गई थी। उसने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि दोनों अपनी इच्छा से साथ जीवन बिताने का फैसला कर चुके हैं।
दोनों की बात सुनने के बाद अदालत ने पुलिस और जेल प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया के तहत विवाह संपन्न कराने के निर्देश दिए। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार किए गए और दोनों की सहमति को रिकॉर्ड में लिया गया।
जेल परिसर में सजा विवाह मंडप
अदालती अनुमति मिलने के बाद जगदलपुर केंद्रीय जेल परिसर में विवाह की व्यवस्था की गई। पुलिस, अधिवक्ताओं और मीडिया प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दोनों ने विधि-विधान से सात फेरे लिए। जेल परिसर में पहली बार किसी विवाह के आयोजन ने इस घटना को खास बना दिया।
जेलर ने बताई पूरी प्रक्रिया
केंद्रीय जेल जगदलपुर के जेलर एस.एल. नायर ने बताया कि सुरेश ने जेल में रहते हुए अपनी प्रेमिका से विवाह करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद दोनों पक्षों से आवेदन प्राप्त किए गए और उनकी सहमति से जुड़े दस्तावेज तैयार कर मामले को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अदालत ने दोनों के बालिग होने और आपसी सहमति को देखते हुए विवाह की अनुमति प्रदान की, जिसके बाद जेल परिसर में विवाह संपन्न कराया गया।
परिवार का विरोध बरकरार
जेल प्रशासन के अनुसार, दोनों परिवारों का रुख एक जैसा नहीं था। लड़की पक्ष ने विवाह की प्रक्रिया में सहयोग किया, जबकि लड़के के परिवार के कुछ सदस्य इस शादी के खिलाफ थे। उनका कहना था कि दोनों अलग-अलग जाति से हैं, इसलिए वे इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करते। हालांकि, दोनों के बालिग होने और अपनी इच्छा से विवाह करने के फैसले के आधार पर कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।
जेल प्रशासन का कहना है कि केंद्रीय जेल जगदलपुर में इस तरह का यह पहला मामला है। आमतौर पर जेल को अपराध और सजा से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस बार जेल परिसर प्रेम और विवाह का साक्षी बना, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है।


